पुलवामा हमला: देवरिया और महराजगंज के भी दो लाल शहीद, गांव-घर में पसरा मातम

शहीद विजय मौर्य

देवरिया/महराजगंज। पुलवामा में हुए आतंकी हमले में पूर्वी यूपी के देवरिया और महराजगंज के दो लाल भी शहीद हुए हैं. उनके लापता होने की खबर आने के बाद से ही गांव और घर में मातम पसरा हुआ है. आतंकी हमले के बाद से ही उनका कहीं कोई पता नहीं चल पाया है. बताया जा रहा है कि सेना के उसी वाहन में दोनों सवार रहे हैं, जिसे आतंकियों ने निशाना बनाया है. यूपी की योगी सरकार ने शहीद जवानों के प्रत्‍येक के परिवार को 25-25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता, परिवार के एक सदस्‍य को नौकरी और गांव के संपर्क मार्ग का नामकरण शहीद के नाम पर करने का ऐलान किया है.

देवरिया जिले के भटनी कस्‍बे के छपिया जयदेव गांव के रहने वाले विजय मौर्य (30 वर्ष) पुत्र रामायन मौर्य दस दिन की छुट्टी के बाद 9 फरवरी को ही वापस ड्यूटी पर कश्‍मीर वापस लौटे थे. उनके जाने के पांचवें दिन उनके शहीद होने की खबर गांव में पहुंची, तो वहां कोहराम मच गया. वे सीआरपीएफ की 92वीं बटालियन में कांस्‍टेबल के पद पर तैनात रहे हैं. उनकी तैनाती वर्तमान में जम्‍मू कश्‍मीर के कुपवाड़ा में रही है. दो फरवरी को वे दस दिन के अवकाश पर गांव आए थे. परिजनों ने बताया कि वे उसी बस में सवार थे, जो आतंकी हमले का शिकार हुई है. घटना के बाद से ही उनका कहीं कुछ पता नहीं चल पा रहा है.

गुरुवार की शाम साढ़े पांच बजे सीआरपीएफ में डीएसपी के पद पर कश्‍मीर में ही तैनात उनके चचेरे भाई राजेश मौर्या ने फोन पर भाई विंदेश को विजय की शहादत की जानकारी दी. राजेश के मुताबिक जम्‍मू से रवाना हुई सीआरपीएफ के काफिल में विजय भी थे. उनकी पत्‍नी विजयलक्ष्‍मी चार साल की बेटी के साथ देवरिया जिले में किराए के मकान में रहती हैं. उनके पिता और भाभी गांव में रहते हैं. विजय पिछले 11 साल से सीआरपीएफ में तैनात रहे है. साल 2008 में उनकी कांस्‍टेबल के पद पर तैनाती हुई थी. 2014 से वे जम्‍मू कश्‍मीर के कुपवाड़ा में तैनात रहे हैं. घटना के बारे में देर रात तक उनके पिता और पत्‍नी को कुछ भी नहीं बताया गया. सुबह जब उन्‍हें घटना की जानकारी दी गई, तो वे बेसुध हो गए.

                                                                                     शहीद पंकज त्रिपाठी

महराजगंज जिले के फरेंदा थानाक्षेत्र के हरपुर मिश्र गांव के बेलहिया टोला के टोला निवासी पंकज त्रिपाठी (35 वर्ष) पुत्र ओम प्रकाश त्रिपाठी शहीद हुए हैं. उनके शहीद होने की खबर गांव में आते ही मातम पसर गया है. उनके घर में कोहराम मचा हुआ है. जम्मू कश्मीर के पुलवामा सेक्टर में उनकी तैनाती रही है. वे तीन दिन पहले अपने घर से छुट्टी बिताकर ड्यूटी पर गए थे. बुधवार को उन्‍होंने वहां पर ड्यूटी ज्‍वाइन की थी.

शहीद पंकज के पिता ओम प्रकाश त्रिपाठी ने जम्मू सीआरपीएफ मुख्यालय से आए फोन के हवाले से उनके शहीद होने की जानकारी दी है. उनके परिवार के लोग जम्मू रवाना हो गए हैं. शहीद पंकज का शव भी अब तक नही मिला है. परिजनों के पास फोन आया था कि केवल पंकज त्रिपाठी की आईडी मिली है. उनका मोबाइल नंबर भी ऑफ जा रहा है. पंकज की तीन साल पहले शादी हुई थी. उनकी पत्‍नी रोहिणी और तीन साल का बेटा है. पत्‍नी का रो-रोकर बुरा हाल है.