केसीआर ने तीसरे मोर्चे के लिए ‘दक्षिण भारत से प्रधानमंत्री’ का फॉर्मूला आगे बढ़ाया

नई दिल्ली। लोकसभा के इस चुनाव में पांच चरणों के मतदान के गुजर जाने के बाद तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट फिर तेजी पकड़ रही है. एनडीटीवी के मुताबिक इस क्रम में इसी सोमवार को तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने केरल के अपने समकक्ष पिनरायी विजयन से मुलाकात की. उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री के साथ गैर कांग्रेस और गैर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) वाले तीसरे ‘संघीय मोर्चे’ के गठन को लेकर बातचीत की. साथ ही ‘1996 के फार्मूले’ पर लोकसभा के इस चुनाव में ‘दक्षिण भारत से प्रधानमंत्री’ देने का प्रस्ताव भी रखा. गौरतलब है कि नब्बे के दशक में अस्थिर गठबंधनों वाले उस दौर में तीन प्रधानमंत्रियों ने सत्ता संभाली थी.

माना जा रहा है कि लोकसभा के इस चुनाव के नतीजों का दिन (23 मई) आते-आते केसीआर संघीय मोर्चे के गठन की कवायद और तेज करेंगे. इस संबंध में वे इसी महीने की 13 तारीख को द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के प्रमुख एमके स्टालिन से भी मुलाकात कर सकते हैं. इसके अलावा केसीआर की उत्तर और पूर्वी भारत के राज्यों का दौरा करने की भी योजना है. इस दौरे में उनकी समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से मुलाकात होने की संभावना है.

इससे पहले भी केसीआर ने पिछले साल उत्तर और पूर्वी भारत के राज्यों का दौरा किया था. साथ ही वे अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती से मुलाकात के लिए दिल्ली भी आए थे. लेकिन तब अन्य व्यस्तताओं की वजह से सपा और बसपा के प्रमुख उनसे मुलाकात नहीं कर पाए थे. इसके अलावा उन्होंने डीएमके के साथ भी गठजोड़ करने की दिशा में कदम बढ़ाए थे. लेकिन उसी दौरान पार्टी प्रमुख रहे एम करुणानिधि का निधन हो गया था. उसके बाद पार्टी की कमान संभालने वाले एमके स्टालिन ने कांग्रेस से हाथ मिला लिया था.

इस बीच सोमवार को केसीआर के साथ हुई मुलाकात को पिनरायी विजयन ने ‘अत्यंत प्रासंगिक’ बताया है. साथ ही यह भी कहा है, ‘इस बैठक में केसीआर और मेरे बीच राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा हुई थी.’ उन्होंने आगे कहा, ‘केसीआर का आकलन है कि लोकसभा के इस चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधनों को बहुमत नहीं मिलेगा. तब केंद्र सरकार के गठन में क्षेत्रीय दल व्यापक भूमिका निभाएंगे.’ उन्होंने यह भी कहा कि संघीय मोर्चे की तरफ से प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी कौन होगा इस बारे में फिलहाल कोई बात नहीं हुई है.