भारत और अफगानिस्तान पर खतरा, गठजोड़ कर बड़े हमले की तैयारी में आतंकी संगठन

नई दिल्ली। क्या अब आतंकवादियों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सांठगांठ करके आतंकी कार्रवाइयों करने को अपनी स्थायी रणनीति बना लिया है. हाल ही में मिली कुछ खुफि़या जानकारियों के बाद एजेंसियां अब इसी सवाल पर मंथन कर रही हैं. हाल ही में मिले कई ऐसे सुराग इस आशंका को सच साबित कर रहे हैं. पहले भी आतंकवादियों ने ऐसे गठजोड़ किए थे, लेकिन अब इनके ज्यादा व्यवस्थित और संगठित होने की ख़बरें हैं.

अलकायदा और जैश ए मोहम्मद ने मिलाया हाथ
सबसे बड़ी जानकारी ये है कि अल क़ायदा (Al-Qaeda) अब जैश ए मोहम्म्द (Jaish-e-Mohammad) के साथ बहुत क़रीब से मिलकर काम कर रहा है. अब्दुल्ला अल्हंद नाम का एक आतंकवादी जो अल क़ायदा के लिए काम करता है ने भारत में पठानकोट हमले की तर्ज पर आत्मघाती हमले की योजना बनाई है. इसके लिए उसकी मदद जैश ए मोहम्मद करेगा. यानि हमले की जगह की रेकी करना, हमलावर तैयार करना और हमले की पूरी कार्रवाई जैश ए मोहम्मद करेगा. लेकिन इस हमले की ज़िम्मेदारी अल क़ायदा लेगा. इसके लिए पाक अधिकृत कश्मीर में मुज़फ्फराबाद ज़़िले के ख़ैर गली नामक गांव में ट्रेनिंग कैंप खोला गया है.

लश्कर के 1200 आतंकियों ने तालिबान से हाथ मिलाया
दूसरी बड़ी ख़बर ये है कि अफ़ग़ानिस्तान के ग़ज़नी ज़िले के अंदार इलाक़े में जैश ए मोहम्मद और लश्करे तैयबा के क़रीब 1200 आतंकवादी तालिबान के साथ मिलकर लड़ने के लिए इकट्ठे हुए हैं. तालिबान ने 12 अप्रैल को अफ़ग़ानिस्तान की सरकार और नाटो सेनाओं पर हमले के लिए नए अभियान की घोषणा की थी, जिसे अल फ़तह नाम दिया गया है. इन आतंकवादियों की ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान के क़बायली इलाक़ों में ख़ैबर और ख़ुर्रम ज़िलों में कैम्प खोले गए हैं.

अंतर्राष्ट्रीय खुफ़िया एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि ये नया गठजोड़ किसी आतंकवादी कार्रवाई के लिए होने वाली साझेदारी से भी आगे की रणनीति है. पहले भी जेहादी गिरोह एक-दूसरे की मदद करते रहे हैं, लेकिन अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक संगठन बनाकर अलग-अलग देशों में आतंकवाद फैलाने की तैयारी है.

हाल ही में आईएसआईएस ने भारत में अपनी एक विलायत यानि विदेश में ठिकाना बनाने की घोषणा की थी. इंडोनेशिया और थाईलैंड में जेहादी हरक़तें बढ़ रही हैं. श्रीलंका, बांगलादेश और म्यांमार में सक्रिय स्थानीय आतंकवादी गिरोहों को दूर बैठकर संचालित किया जा रहा है. रक्षा विशेषज्ञ का कहना है, ‘लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि इन आतंकवादियों को एक छत के नीचे लाने का काम कौन करेगा और क्या वही पिछले कुछ वक्त से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ताक़तवर जेहादी गिरोह की गैरहाज़िरी को भी भरेगा.’