पिछले पांच सालों से हर गर्मी में कहर बरपा रहा चमकी बुखार, 2014 में हुई थी 355 मौतें

मुजफ्फरपुर। बिहार में एक तरफ भीषण गर्मी के कहर से लोगों की लगातार मौत हो रही है तो दूसरी ओर चमकी बुखार के कारण बच्चों की मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है. बिहार में जहां चमकी बुखार से 110 बच्चों की मौत हो चुकी है वहीं,  मुजफ्फरपुर के बाद अब एईस (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) से कई और भी जिले प्रभावित हो रहे हैं.

अब पूर्वी चम्पारण जिले में भी चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ती ही जा रही है. जिले के अब तक एईएस के 36 बच्चे नए मामले सामने आ चुके हैं. सबसे अधिक गौर करने वाली बात ये है कि चमकी बुखार हर साल गर्मियों के मौसम में खासकर बिहार के मुजफ्फरपुर में दस्तक देती है लेकिन फिर भी स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा है कि इस बीमारी पर रिसर्च के लिए एक साल का समय चाहिए और इसके लिए टाइम लाइन दी गई है.

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चमकी बुखार से 2014 में 355 बच्चों ने अपनी जिंदगी खो दी थी वहीं, 2015 में यह आंकड़ा घटकर 225 हुआ. लेकिन 225 बच्चों की मौत के बाद भी सरकार ने इसे रोकने या इसका कारण जानने के लिए कोई खास कदम नहीं उठाया क्योंकि अगर ऐसा होता तो शायद रिसर्च के लिए एक साल का टाइम देने की नौबत ही नहीं आती.

2016 में बिहार में चमकी बुखार से 102 बच्चों की मौत हुई थी और 2017 में घटकर 54 और 2018 में 33 हो गया. 2013 से बिहार में इस बीमारी की वजह से हर साल कई बच्चों की मौत हो रही है.

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वहीं, मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच अस्पताल के अधिक्षक एस के शाही ने परिजनों को बच्चों को चमकी बुखार से बचाने का सुझाव दिया है और कहा है कि वो गर्मी के समय में अधिक से अधिक बच्चों का ख्याल रखें.

पिलाएं अधिक पानी
एस के शाही ने कहा है कि इस मौसम में बच्चों को अधिक से अधिक पानी पिलाएं ताकि वो पूरे दिन हाइड्रेट रहें और वो जल्दी बीमार नहीं पड़ेंगे.

गर्मी से बचाएं
परिजनों से एसकेएमसीएच के अधिक्षक ने कहा है कि किसी भी हाल बच्चों को गर्मी और उमस से बचाएं. इस भीषण गर्मी का असर सबसे जल्दी बच्चों पर हो रहा है इसलिए उनका गर्मी से बचकर रहना बेहद जरूरी है.

दो बार नहलाएं
एस के शाही ने कहा है कि गर्मी के मौसम में बच्चों दिन भर में दो बार नहाएं और चीनी, नमक और पानी घोल दें. लेकिन फिर भी लक्षण लगे तो पारासिटामोल की गोली या सिरप दें.