अमेरिकी ड्रोन मार गिराने के चलते ईरान पर हमला करने वाले थे ट्रंप, आखिरी समय में वापस लिया फैसला

नई दिल्ली। 19 जून की रात ईरानी सेना के मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने अमेरिका के 1250 करोड़ की कीमत वाले सबसे आधुनिक ड्रोन MC-4Q ट्रीटोन को मार गिराया. इस धमाके की गूंज ऐसी थी जिसने विश्व की महाशक्ति अमेरिका को हिला कर रख दिया. ईरान का दावा है कि ये कार्रवाई उस वक्त हुई जब अमेरिकी विमान उसकी सीमा के ऊपर से गुजर रहा था. वहीं अमेरिका का दावा है कि ड्रोन को जब मारा गया तब वो अंतरराष्ट्रीय हवाई सीमा में उड़ान भर रहा था. ईरान ने अपने दावे को सही साबित करने के लिए आज ड्रोन का मलबा भी मीडिया के सामने रखा. इरान ने दावा किया कि ये मलबा उसने अपनी समुद्री सीमा में कब्जे में लिया है.

ईरान की इस कार्रवाई के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को सीधे-सीधे चेतावनी दे दी. अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इस बयान के बाद ट्रंप ने ईरान पर हमले का आदेश दे दिया. गुरुवार शाम फारस की खाड़ी का आसमान अमेरिकी लड़ाकू विमानों की आवाज से गूंज उठा. घातक मिसाइलों से लैस लड़ाकू विमान ईरान की हवाई सीमा तक पहुंच गए. निशाने पर ईरान के रडार सिस्टम और मिसाइल बैटरी के ठिकाने थे लेकिन हमले से ठीक पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने अपना आदेश वापस ले लिया.

माना जा रहा है कि अपने ही देश में राजनीतिक दबाव के बाद ट्रंप को फैसले से पीछे हटना पड़ा. -युद्ध की सूरत में रूस, ईरान की तरफ से खड़ा होता इसकी भी आशंका थी, अफगानिस्तान के बाद एक और युद्ध अमेरिका पर भारी पड़ सकता था. अमेरिका चुनावी मूड में है इसलिए भी राष्ट्रपति ट्रंप रिस्क नहीं लेना चाहते थे. ट्रंप ने भले ही युद्ध का फैसला टाल दिया लेकिन तेवर अब भी तल्ख हैं.

फारस की खाड़ी में भले ही विमानों की आवाज शांत हो गई हो लेकिन युद्ध के बादल अभी छटे नहीं है. इसीलिए अमेरिका-ईरान की तनातनी के बीच भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन संकल्प शुरू किया है. आईएएनएस चेन्नई और आईएएनएस सुनयना के अलावा समुद्रीय इलाकों पर नजर रखने वाले एयरक्राफ्ट को भी तैनात किया है. बता दें कि भारत का 40% क्रूड ऑयल इसी रास्ते से आता है.

अमेरिका की धमकी का असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है. युद्ध की आशंका से भारतीय शेयर बाजार आज 407 अंक गिर गया जबकि तेल की कीमत में 6 फीसदी का उछाल आ गया. एहतियात के तौर पर ईरान की वायुसीमा से होकर गुजरने वाले विमानों का रास्ता भी बदला गया है.

ये पहला मौका नहीं है जब ईरान और अमेरिका इस हद तक एक दूसरे के आमने सामने आ गए हों…विमानों को निशाना बनाने की शुरूआत अमेरिका ने की थी. 3 जुलाई 1988 को अमेरिका के USS विंसेंस डिस्ट्रायर ने ईरान की सीमा में घुसकर दुबई जा रहे उसके यात्री विमान को मार गिराया था जिसमें 290 लोगों की मौत हो गई थी.