राज्यसभा में बहुमत नहीं होने के बावजूद मोदी सरकार पास करवा सकती है तीन तलाक बिल, यह है पूरा गणित

नई दिल्ली। केंद्र सरकार और विपक्ष राज्यसभा में एक बार फिर तीन तलाक बिल को लेकर आमने-सामने होंगे. इस दौरान सरकार मुस्लिमों के बीच तीन तालक को दंडनीय बनाने के लिए कुछ गैर एनडीए, गैर-यूपीए पार्टियों पर निर्भर रहेगी. बीजेपी के पास राज्य सभा में बहुमत नहीं है लेकिन उसने बीजू जनता दल, तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) और वाईएसआर कांग्रेस के समर्थन से पिछले सप्ताह सूचना का अधिकार विधेयक राज्य सभा में पारित कराया था. ऐसे में वह कई तरह के अंक गणित पर ध्यान दे रही जिससे राज्यसभा में तीन तलाक बिल को पास करवाया जा सके.

तीन तलाक बिल को राज्यसभा में पास कराने को लेकर भी बीजेपी को इन दलों से समर्थन की फिर से उम्मीद है, लेकिन चुनौती यह है कि एनडीए के साथी जनता दल (यू) द्वारा बिल का समर्थन नहीं करने का एलान किया गया है. ऐसे में आइए देखते हैं कैसे बीजेपी राज्यसभा में टीआरएस, बीजेडी और वाईएसआर कांग्रेस के समर्थन से तीन तलाक बिल को पास करवा सकती है.

आइए देखते हैं बीजेपी कैसे बिल को पास करवा सकती है

राज्य सभा में कुल 241 सांसद हैं और किसी भी बिल को पास करवाने के लिए 121 वोट चाहिए. बीजेपी के 78 सांसद राज्यसभा में हैं तो वहीं अन्य NDA दलों की बात करें तो AIDMK 11, जेडीयू 6, शिवसेना 3, शिरोमणी अकाली दल 3 और निर्दलीय और नामांकित 12 सासंद हैं. इस तरह NDA के पक्ष में कुल 113 सांसदों का वोट तय माना जा रहा है लेकिन यह संख्या मेजोरिटी के 121 के मार्क से 8 कम है. ऐसे में अगर उसे बीजेडी के सात सांसद, तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के 6, वाईएसआर कांग्रेस के दो सांसदों का साथ मिलता है तो बिल के समर्थन में 128 वोट पड़ेंगे और बिल आसानी से पास हो जाएगा.

गैर यूपीए और गैर एनडीए सांसदों की होगी अहम भूमिका

जहां राज्य सभा में NDA के 113 सांसद हैं तो वहीं यूपीए की बात करें तो उसके पास कुल 68 सांसद राज्य सभा में हैं. कांग्रेस के 48, आरजेडी के 5, एनसीपी के 4, डीएसके के5, जेडीएस के 1 और निर्दलीय और नामांकित सदस्यों की संख्या 5 है. यूपीए और एनडीए के अलावा जो सांसद राज्य सभा में तीन तलाक बिल को पास करवाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं वह हैं बीजेडी के सात सांसद, तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के 6, वाईएसआर कांग्रेस के दो और एनपीएफ का एक सांसद. इसके अलावा दो निर्दलीय सांसद भी हैं. यानि गैर यूपीए और गैर एनडीए के 18 सांसदों पर सबकी नजर होगी. बीजेपी को अगर इनका साथ मिला तो बिल आसानी से पास हो जाएगा.