तीन तलाक दिए तो जेल जाएंगे पति, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बना तलाक बिल

नई दिल्ली। राज्यसभा से तीन तलाक बिल पास होने के बाद अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई. तीन तलाक बिल के खिलाफ बना मुस्लिम विमेन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरेज) बिल अब औपचारिक रूप से कानून बन गया है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस बिल पर दस्तखत कर दिए हैं. यह कानून 19 सितंबर 2018 से लागू माना जाएगा. इस कानून के तहत अब एक साथ तीन तलाक देना कानूनन अपराध है और इसके लिए तीन साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है.

बता दें कि जब बिल राज्यसभा से पास हुआ था तब राष्ट्रपति ने इसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए इसका स्वागत किया था. राष्ट्रपति ने ट्विटर पर लिखा, ”राज्य सभा में मुस्लिम विमेन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरेज) बिल के पारित होने से ‘तीन तलाक’ की अन्यायपूर्ण परंपरा के प्रतिबंध पर संसदीय अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी हो गयी है। यह महिला-पुरुष समानता के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है; पूरे देश के लिए संतोष का क्षण है .”

कानून बनने से आगे क्या होगा?
तीन तलाक के खिलाफ पीड़ित या परिवार के सदस्य ही दर्ज केस करा सकेंगे. एफआईआर दर्ज होने पर बिना वारंट गिरफ्तारी हो सकेगी, इसके साथ ही आरोपी को पुलिस जमानत नहीं दे सकेगी. पत्नी का पक्ष जानने के बाद मजिस्ट्रेट जमानत देंगे, मजिस्ट्रेट को सुलह कराने का अधिकार भी होगा. तीन तलाक का केस दर्ज होने बाद फैसला होने तक बच्चा मां के संरक्षण में रहेगा. इसके साथ ही पति को पत्नी और बच्चे के लिए गुजारा भत्ता देना होगा.

तीन तलाक क्या है जिसे खत्म किया गया है?

तीन तलाक ये है कि अगर कोई मर्द तलाक के सही तरीके की नाफरमानी करते हुए भी एक ही बार में तलाक, तलाक और तलाक कह देता है तो तीन तलाक मान लिया जाएगा, यानि तलाक हो गई. अब पति-पत्नी साथ नहीं रह सकते. दोबारा शादी नहीं हो सकती, समझौता नहीं हो सकता. तलाक वापस नहीं लिया जा सकता. चाहे मर्द ने गुस्से में ही तीन तलाक क्यों नहीं दिया हो.

कैसे पास हुआ राज्यसभा में तीन तलाक बिल?
राज्यसभा में बहुमत ना होने के बावजूद मोदी सरकार ने तीन तलाक बिल पास करवा लिया. विधेयक में तीन तलाक का अपराध सिद्ध होने पर संबंधित पति को तीन साल तक की जेल का प्रावधान किया गया है. बिल के पक्ष में 99 वोट पड़े जबकि खिलाफ में 84 वोट पड़े, वोटिंग के वक्त 183 सांसद ही सदन में मौजूद थे. इससे पहले बिल को राज्यसभा की सेलेक्ट कमेटी को भेजना का प्रस्ताव 84 के मुकाबले 100 मतों से खारिज हो गया. राज्यसभा में दूसरा मौका है जब सरकार ने राज्यसभा में संख्या बल अपने पक्ष में नहीं होने के बावजूद महत्वपूर्ण विधेयक को पारित करवाया. इससे पहले कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के विरोध के बावजूद आरटीआई संशोधन विधेयक को उच्च सदन में पारित करवाने में सरकार सफल रही थी.

पीएम बोले- कुप्रथा को इतिहास के कूड़ेदान में डाला गया
तीन तलाक बिल पास होने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वागत करते हुए कहा कि कुप्रथा को इतिहास के कूड़ेदान में डाला गया है. प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, ”एक पुरातन और मध्यकालीन प्रथा आखिरकार इतिहास के कूड़ेदान तक ही सीमित हो गई है! संसद ने ट्रिपल तालक को समाप्त कर दिया और मुस्लिम महिलाओं के लिए की गई ऐतिहासिक गलती को सही किया. यह जेंडर जस्टिस की जीत है और इससे समाज में समानता आएगी. आज भारत खुश है.” पीएम ने कहा, ”पूरे देश के लिए आज एक ऐतिहासिक दिन है. आज करोड़ों मुस्लिम माताओं-बहनों की जीत हुई है और उन्हें सम्मान से जीने का हक मिला है. सदियों से तीन तलाक की कुप्रथा से पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को आज न्याय मिला है. इस ऐतिहासिक मौके पर मैं सभी सांसदों का आभार व्यक्त करता हूं.”