‘शिवसेना ने जनादेश का अपमान किया, जनता को स्थिर सरकार चाहिए’ – महाराष्ट्र CM देवेंद्र फडणवीस

मुंबई। महाराष्ट्र में चुनावी नतीजों के बाद से सरकार गठन को लेकर लंबे समय से चल रहे रहे राजनीतिक घमासान पर रातों-रात विराम लग गया। इसके परिणामस्वरुप महाराष्ट्र में आज सुबह देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की दोबारा शपथ ली। वहीं, एनसीपी नेता अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री और अजित पवार को उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर शुभकामनाएँ दी हैं।

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “जनता ने हमें स्पष्ट जनादेश दिया था, शिवसेना ने जनादेश का अपमान किया है। महाराष्ट्र की जनता को स्थिर और स्थाई सरकार चाहिए, खिचड़ी सरकार नहीं चाहिए।”

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए एनसीपी के साथ मिलकर काम करेंगे।

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Devendra Fadnavis after taking oath as Maharashtra CM again: People had given us a clear mandate, but Shiv Sena tried to ally with other parties after results, as a result President’s rule was imposed. Maharashtra needed a stable govt not a ‘khichdi’ govt.

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महाराष्ट्र में अब तक राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP), कॉन्ग्रेस और शिवसेना के बीच सरकार गठन को लेकर कोशिशें की जा रही थी। इसके लिए शुक्रवार (22 नवंबर) को तीनों पार्टियों के बीच दो घंटे तक बैठक भी हुई। इस बैठक में उद्धव ठाकरे के नाम पर सहमति बनी थी। लेकिन, शनिवार को राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदल गए और महाराष्ट्र में बीजेपी और NCP ने मिलकर नई सरकार का गठन किया।

हाल ही में, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं जलमार्ग विकास मंत्री नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र की राजनीति पर इशारों में बड़ा बयान दिया था। उन्होंने एक समारोह में कहा था कि राजनीति और क्रिकेट में कुछ भी हो सकता है। कई बार आपको लगता है कि आप मैच हार रहे हैं लेकिन नतीजा उसके ठीक उलट होता है। जो आज वास्तविकता में तब्दील हो गया।

ग़ौरतलब है कि महाराष्ट्र विधानसभा की 288 सीटों के लिए 21 अक्टूबर को चुनाव हुए थे और नतीजे 24 अक्टूबर को आए थे। राज्य में किसी पार्टी या गठबंधन के सरकार बनाने का दावा पेश नहीं करने की वजह से राज्य में 12 नवंबर को राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। शिवसेना के मुख्यमंत्री पद की माँग को लेकर बीजेपी से 30 साल पुराना गठबंधन तोड़ने के बाद से राज्य में राजनीतिक संकट खड़ा हो गया था।