अब तेरा क्या होगा ‘कालिया’? आ गई औकात में शिवसेना, पवार की पलटी से गच्चा खाया

नई दिल्ली। महाराष्ट्र का सियासी समीकरण कुछ इस कदर उलझ गया है कि अगले पल क्या होने वाला है, इसका अंदाजा तक लगा पाना भी बेहद मुश्किल  हो चुका है. कभी शिवसेना अपने सहयोगी दल का साथ छोड़कर, गठबंधन तोड़कर उन विरोधियों के साथ हाथ मिला लेती है, जिसे कभी सामने से फूटी आंख देखना भी पसंद नहीं करती थी. तो कभी उसकी हाल ही में बने दो दोस्त (कांग्रेस और शिवसेना) की तरफ से ऐसा बययान सामने आता है, जिसे देखकर ये शंका होने लगती है कि कहीं उसके पुराने दुश्मन ठाकरे परिवार के साथ कहीं खेल तो नहीं खेल रहे हैं.

शिवसेना की जो हालत हो गई है, उसे देखकर शोले फिल्म का एक बेहतरीन सा डायलॉग याद आ रहा है. गब्बर सिंह अपने एक पुराने साथी को दिए काम में नाकामयाब होने के बाद एक सवाल पूछता है, ‘तेरा क्या होगा कालिया?’ पूरे सीन का बखान कर पाना तो फिलहाल मुश्किल है, लेकिन शिवसेना के पास अब कोई चारा नहीं बचा है. उसके एक तरफ कुआं है तो दूसरी तरफ खाई, अब तो शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अपने बड़बोले नेता संजय राउत से ये जरूर पूछ रहे होंगे कि ‘मैं किधर जाऊं भाई?’ जाहिर है, पुत्र मोह के मायाजाल में फंसकर शिवसेना प्रमुख ने अपने साथ-साथ पार्टी की हालत भी ऐसी कर दी है कि लोग उनके सवाल पूछ-पूछकर उनकी खटिया खड़ी कर रहे हैं. लेकिन शिवसेना के इस हाल की जिम्मेदार वो खुद ही हैं. उसकी जिद और संजय राउत का बड़बोलापन शिवसेना-भाजपा के रिश्ते में सबसे ज्यादा खटास पैदा करने का काम किया है.

बैकफुट पर आए ‘जनाब’

यहां जनाब से तात्पर्य शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत के परिचय का है, क्योंकि ये वही जनाब है जिन्होंने महाराष्ट्र में नतीजे सामने आने के तुरंत बाद ऐसे तेवर अपना लिए थे, जैसे इन्हें भाजपा-शिवसेना के रिश्ते  में दरार पैदा करने के लिए ही ठेका मिला हो. इतना तो इतना, लेकिन हद तो तब हो जाती, जब ये जनाब शिवसेना के जिस मुखपत्र के संपादक हैं, उस ‘सामना’ में भी भाजपा को खूब कोसा जाता है. लेकिन इस बीच नतीजे आने के बाद से भाजपा से रिश्ते बिगड़ने के बाद तक बड़े-बड़े डींगे हांकने वाले संजय राउत इन दिनों महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर बैकफुट पर आते दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने अपने नए दोस्त से नाराजगी का इशारा करते हुए ये बोला कि सरकार बनाने की जिम्मेदारी शिवसेना की नहीं है जनाब यहीं चुप नहीं हुए, उन्होंने इसके साथ ये भी कहा कि ये जिम्मेदारी जिसकी है वो भाग निकले हैं. संजय राउत का ये बदला तेवर उस वक्त नजर आया जब एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ मुलाकात की. मुलाकात के बाद मानिए पवार के अब ये बयान के दो मायने निकाले जा रहे हैं.

या तो शिवसेना ने इस बात को स्वीकार लिया है कि उनके साथ कांग्रेस-एनसीपी ने जबरदस्त खेल करते हुए उसे गच्चा दे दिया है. क्योंकि सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद एनसीपी प्रमुख ने जब एक बड़ा बयान दिया उसके तुरंत बाद ही राउत ने मीडिया के सामने आकर ये बयान दिया. यानी वो भाजपा के कंधे पर बंदूक रखकर अपने नए दोस्त पर तंज कसने का प्रयास कर रहे थे.

राउत के रुख का दूसरा मायने

राउत के इस बयान से ये तो समझना बिल्कुल साफ है कि वो गठबंधन में पड़े दरार पर अफसोस जताने की कोशिश कर रहे हैं. भाजपा से रिश्ते खराब होने का सारा ठिकरा उसी के मत्थे मढ़ रहे हैं. यानी वो एक बार फिर भाजपा को इस टूट का दोषी बता रहे हैं, लेकिन जनाब के तेवर में काफी तब्दीलियां देखने को मिली, क्योंकि भाजपा के खिलाफ जहर उगलने वाले राउत इस बार थोड़ा कम बोलकर ही ठहर गए.

एनसीपी प्रमुख ने काट ली कन्नी!

शरद पवार ने एक ऐसा बयान दिया जो शिवसेना के लिए किसी करारे तमाचे से कम नहीं है. पवार ने उद्धव ठाकरे को हाई वोल्टेज के झटके से नवाजा है. इसमें कोई दो राय नहीं है, कि भाजपा से नाता तोड़ने के बाद शिवसेना पूरी तरह से कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के सहारे कूद रही थी. लेकिन शिवसेना की पतंग सीएम की कुर्सी तक पहुंचती ही कि एनसीपी प्रमुख ने शिवसेना से कन्नी ही काट ली. शरद पवार ने शिवसेना के साथ किसी कॉमन मिनिमम प्रोग्राम (CMP) पर सहमति से ही इनकार कर दिया है.

इसके अलावा महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर जब उनसे सवाल पूछा गया कि तो उन्होंने चुप्पी साध ली, पवार ने इसके बाद ये तक कह दिया कि कांग्रेस और एनसीपी ही इस पर फैसला नहीं ले सकते, अन्य सहयोगियों से भी बात करेंगे. उन्होंने इस सवाल पर भी कुछ नहीं बोला कि क्या उनकी पार्टी ने सरकार बनाने के लिए शिवसेना को किसी तरह को कोई भरोसा दिया है.

 

इन सबके बीच सबसे हैरानी उस वक्त हुई जब शरद पवार के इस बयान और चुप्पी के बाद शिवसेना नेता संजय राउत मुंह उठाकर एनसीपी प्रमुख से मुलाकात करने पहुंच गए. मुलाकात के बाद राउत ने एक बाद फिर इस गठबंधन का ठिकरा तो भाजपा के सिर पर फोड़ दिया. लेकिन सच्चाई क्या है और कौन कितना सच्चा है इसके बारे में कुछ भी बोल पाना बेहद मुश्किल होगा. सवाल यहां ये भी है कि क्या शरद पवार का रुख देखकर क्या शिवसेना घबराने लगी थी कि कहीं, उसकी चालाकी उसी पर भारी ना पड़ जाए, जो होता दिखाई दे रहा है. लेकिन अब अगर एनसीपी-कांग्रेस ने शिवसेना से कन्नी काट ली है तो उसके पास चारा क्या बचा है.

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Sanjay Raut,Shiv Sena after meeting NCP Chief Sharad Pawar: The responsibility to form Govt was not ours, the ones who had that responsibility ran away, but I am confident that soon we will have a Govt in place.

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आपको बता दें, महाराष्ट्र विधानसभा के नतीजे जब सामने आए तो उसमें शिवसेना-भाजपा गठबंधन को बहुमत हासिल हुई थी, लेकिन शिवसेना मुख्यमंत्री पद के लिए जजिद पर अड़ गई और देखते ही देखते भाजपा से नाता तोड़ ली. चुनावी नतीजों में भाजपा को 105 सीट, शिवसेना को 56, एनसपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटों पर जीत मिली थी, लेकिन बहुमत किसी भी पार्टी को नहीं मिली थी, लेकिन सरकार बनाने को लेकर शिवसेना के साथ बड़ा खेल होता दिखाई दे रहा है. लेकिन महराष्ट्र की जनता प्रदेश में हो रहे राजनीतिक उठापटक से तंग आ चुकी है. हर वोटर खुद को ठगा महसूस कर रहा है.