लाखों सैनिकों की अनसुनी कहानियों के साथ रिलीज हुई फिल्म ‘बंकर’

हर सैनिक के पास बताने के लिए एक कहानी है, लेकिन उसे अपनी भावनाओं पर लगाम लगाकर रखना होता है. आज (17 जनवरी) सिनमाघरों में भारत की पहली एंटी-वार फिल्म ‘बंकर (Bunker)’ रिलीज हुई है, जिसका उद्देश्य लाखों सैनिकों की अनसुनी कहानियों को जन-जन तक पहुंचाना है. निर्देशक जुगल राजा की ‘बंकर’ लेफ्टिनेंट विक्रम सिंह (अभिनेता अभिजीत सिंह द्वारा अभिनीत) की एक ऐसी कहानी बताती है, जो जम्मू-कश्मीर के एलओसी स्थित पुंछ में एक गुप्त बंकर में एक घातक चोट के साथ जीवित बचे थे, जिसे युद्ध विराम उल्लंघन के दौरान मोर्टार शेल से मारा गया था.

5 दिन में हुई 95 फीसदी हिस्से की शूटिंग
‘बंकर’ के 95 फीसदी हिस्से की शूटिंग रिकॉर्ड पांच दिनों में 12 फीट वाले आठ बंकरों में की गई है. एक सैनिक के लिए ‘बंकर’ को एक रूपक के रूप में प्रयोग किया जाता है, जो हमेशा परिवार से दूर रहने और देश के प्रति कर्तव्य के विचार के साथ सीमा पर तैनात हैं. ऐसे में यह निश्चित रूप से आपके अंदर देशभक्ति की भावना पैदा करेगा. सैनिकों के 96 फीसदी मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा करने या किसी भी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को स्वीकार करने से देश को बड़ा कलंक लगता है. लेकिन, सच तो यह है कि भारत में लगभग एक मिलियन सैनिक हैं और 2003 के बाद से हर साल करीब सौ सैनिकों ने आत्महत्या की है. फिल्म में मेंटल हेल्थ, आर्मी परिवारों के बीच इंटर-पर्सनल रिलेशनशिप और एक सैनिक और उनके परिवार के बीच सीमा पार होने की अंतिम कीमत का भुगतान करने जैसे महत्वपूर्ण और तनावपूर्ण मुद्दे शामिल हैं.

एंटी-वार फिल्म बनाने की कोशिश
लेखक-निर्देशक जुगल राजा बताते हैं, ‘बॉलीवुड में करियर बनाने में रजनीकांत और मणिरत्नम जैसे दिग्गज मेरे प्ररेणास्त्रोत रहे हैं. ‘बंकर’ प्रतिष्ठित फिल्म ‘रोजा’ के लिए मेरी श्रद्धांजलि है. ‘बंकर’ के साथ मैंने एक एंटी-वार फिल्म बनाने की कोशिश की है, जो आज की पूरी तरह से अशांत दुनिया के हिसाब से बेहद प्रासंगिक है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘फिल्म एक आर्मी सोल्जर्स के जीवन के भावनात्मक भाग को सामने लाती है. इसमें कई सैन्य अधिकारियों के जीवन के उदाहरण हैं और हमारे देश की सेवा करने वाली लाखों आत्माओं की जीवनी को दर्शाया गया है.’

रेखा भारद्वाज का गाना ‘लौट के घर जाना
लीड एक्टर अभिजीत सिंह ने बताया, ‘मैंने फिल्म के लिए तैयारी करते हुए एक सख्त अनुशासन का पालन किया. विक्रम सिंह का चरित्र हर दूसरे सैनिक की तरह है, जिससे कोई भी रिलेट कर सकता है. उनके पास भी एक वैसा ही पल था, जैसा कि विंग कमांडर अभिनंदन के साथ घटी घटना के दौरान गुजरा था, जिसके विमान को हवाई डॉगफाइट में मार गिराया गया था और 60 घंटे तक पाकिस्तान में बंदी बनाकर रखा गया था.’ अपने अनुभव के बारे में अभिजीत सिंह ने कहा, ‘‘बंकर’ की शूटिंग 2018 में विंग कमांडर अभिनंदन की घटना से करीब तीन महीने पहले हुई थी. जब मैंने पहली बार विंग कमांडर अभिनंदन की तस्वीरों को इंटरनेट पर देखा, तो यह एक दर्पण में खुद को देखने जैसा था.’ फिल्म में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता गायिका रेखा भारद्वाज ने ‘लौट के घर जाना है’ गाना बहुत ही दिल खोलकर गाया है. यह एक पीसफुल गाना है, जो कहानी का अभिन्न अंग है.