अमेरिका से न्यूक्लियर और मिसाइल तकनीक स्मगलिंग करते फिर पकड़ा गया पाकिस्तान

पाकिस्तान के ऊपर न्यूक्लियर स्मग्लिंग और अवैध तरीके से मिसाइल टेक्नॉलोजी को हासिल करने का आरोप कोई नया नहीं है। बिना किसी विज्ञान और तकनीक के आधार पर अपने वैज्ञानिक एक क्यू खान की मदद से चोरी और धोखाधड़ी करके पाकिस्तान पहले परमाणु शक्ति संपन्न देश बना, फिर बैलिस्टिक मिसाइल पावर हासिल की। और अब एक बार फिर उसे तकनीक की चोरी करते पकड़ा गया है।

दरअसल, बुधवार को रावलपिंडी स्थित कंपनी ‘बिजनस वर्ल्ड’ से जुड़े पाँच पाकिस्तानियों पर अमेरिका में आरोप लगा है कि उन्होंने पाकिस्तान के न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम के लिए अमेरिकी तकनीक की स्मगलिंग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट ने पाकिस्तान की चोरी पकड़ते हुए उसका खुलासा किया। उन्होंने कहा, ये पाँच पाकिस्तानी, हॉन्गकॉन्ग और यूके में रहते हैं। इनकी पहचान पाकिस्तान के मोहम्मद कामरान वली (41), कनाडा के मोहम्मद एहसान वली (48) और हाजी वली मोहम्मद शेख (82), हांगकांग के अशरफ खान मोहम्मद और इंग्लैंड के अहमद वहीद (52) के रूप में की गई है। जानकारी के अनुसार
इन सब पर इंटरनेशनल एनर्जी इकोनॉमिक पावर्स ऐक्ट और एक्सपोर्ट कंट्रोल रिफॉर्म ऐक्ट के उल्लंघन की साजिश रचने का आरोप लगा है।

विभाग का कहना है, “ये लोग बिजनस वर्ल्ड के लिए दुनियाभर से खरीद करने का नेटवर्क चलाते थे। बिजनस वर्ल्ड अडवांस्ड इंजिनियरिंग रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (एईआरओ) और पाकिस्तान एटॉमिक एनर्जी कमिशन (पीएईसी) के लिए अमेरिका में बने उत्पाद खरीदती है। यह कंपनी अमेरिका से सामानों का निर्यात बिना एक्सपोर्ट लाइसेंस के ही करवाती है जो अमेरिकी कानून का खुला उल्लंघन है।”

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अमेरिकी असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल जॉन सी डेमर्स ने कहा, “प्रतिवादियों (पाकिस्तानियों) ने अमिरेका में निर्मित उत्पाद उन संस्थानों को निर्यात किए जिन्हें अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में चिह्नित किया गया है क्योंकि इन संस्थानों के संबंध पाकिस्तान के हथियार कार्यक्रमों से है।” उन्होंने कहा, “यह एक ऐसा मुद्दा है जो अमेरिका के लिए एक उदाहरण बन सकता है कि उसे निर्यात के नियमों को लागू करने में कड़ाई बरते।”

इसके अलावा, होमलैंड सिक्यॉरिटी इन्वेस्टिगेशंस के ऐक्टिंग स्पेशल एजेंट इन चार्ज जैसन मोलिना ने कहा, “इन पाँच लोगों का कथित व्यवहार अमेरिकी निर्यात कानूनों के उल्लंघन से कहीं ज्यादा बड़ा मसला है। इसने अमेरिकी सुरक्षा हितों के साथ-साथ क्षेत्र के विभिन्न देशों के बीच नाजुक शक्ति संतुलन के लिए भी खतरा पैदा कर दिया है।”

बता दें जस्टिस डिपार्टमेंट की प्रेस रिलीज के मुताबिक, एईआरओ और पीएईसी, दोनों अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट की एंटिटि लिस्ट शामिल हैं। कॉमर्स डिपार्मटमेंट ही उन संस्थानों के लिए एक्सपोर्ट लाइसेंस अनिवार्य करता है जिनकी गतिविधियाँ अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा या विदेश नीति के हितों के विरुद्ध पाई जाती हैं। पीएईसी को यूएस कॉमर्स डिपार्टमेंट की एंटिटि लिस्ट में 1998 में जबकि एईआरओ को 2014 में शामिल किया गया था।