शाहीन बाग में नवजात की मौत से दुखी ‘राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार’ विजेता 10 साल की बच्ची ने लिखा CJI को पत्र

दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में करीब डेढ़ महीने से धरना-प्रदर्शन चल रहा है। इसी विरोध प्रदर्शन के दौरान ही गत जनवरी 30, 2020 की रात 4 महीने की एक नवजात बच्ची की मृत्यु हो गई थी। नवजात की मृत्यु के बाद देशभर में शाहीन बाग़ में विरोध के लिए बच्चों का इस्तेमाल करने वालों की काफी निंदा की गई।

विरोध प्रदर्शन के लिए बच्चों के इस्तेमाल करने और नवजात की मृत्यु से नाराज ‘राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार’ जीतने वाली 10 साल की जेन गुणारत्न सदावर्ते ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) को एक पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से जेन ने सुप्रीम कोर्ट से निवेदन किया है कि इस तरह के धरना-प्रदर्शन में बच्चों को शामिल ना होने दिया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से दिशानिर्देश जारी करने का भी अनुरोध किया गया है।

ज्ञात हो कि जेन गुणारत्न सदावर्ते एक बहादुर बच्ची है जिसने इसी साल ‘राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार’ जीता है। जेन को मुंबई के क्रिस्टल टॉवर में लगी आग से 17 लोगों की जान बचाने के लिए ‘राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार’ जीतने वाली जेन गुणारत्न ने 4 महीने के बच्चे की मौत से दुखी होकर जस्टिस एसए बोबडे को 5 पन्नों के पत्र में लिखा- “इस घटना ने मुझे एक नागरिक के रूप में हिलाकर रख दिया है। अनुच्छेद 21 के तहत 4 महीने के बच्चे के जीवन को अधिकार का उल्लंघन किया गया, जो अपनी माँ के साथ हर दिन शाहीन बाग में प्रदर्शन के लिए गया था। इस चिट्‌ठी को याचिका भी माना जा सकता है। ऐसे में बच्चों और नवजात को धरना-प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकने के लिए अधिकारियों को निर्देश जारी किए जा सकते हैं।’

अपने पत्र में जेन ने लिखा है कि पुलिस भी बच्चे को प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने में नाकाम रही, जबकि यह उसके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक था। पत्र के जरिए जेन ने पुलिस से बच्चे की मौत के कारणों की जाँच करने की माँग की है। इसके साथ ही दस साल की बच्ची ने ने लापरवाही बरतने के लिए मृतक नवजात बच्चे के माता-पिता आरिफ व नाजिया, दिल्ली पुलिस और शाहीन बाग के आयोजकों को दोषी ठहराने की भी माँग की है।

इस बारे में जेन गुणारत्न के माता-पिता का कहना है कि उनकी बेटी शाहीन बाग का विरोध नहीं कर रही, बल्कि उसने बच्चों के दर्द को उजागर किया है, क्योंकि वे अपना दर्द नहीं जता सकते। जेन के माता-पिता ने कहा कि बच्चों का इस्तेमाल करना यातना और क्रूरता है।