इतनी बड़ी जीत के बाद केजरीवाल की कैबिनेट में क्या जगह पाएंगे अमानतुल्ला खान?

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर करिश्मा कर दिखाया है और वह तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है. आप की इस प्रचंड जीत के साथ ही ओखला से आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खान ने भी जीत का रिकॉर्ड बनाया है. ऐसे में चर्चा ये हो रही है कि क्या अमानतुल्ला को केजरीवाल कैबिनेट में जगह मिलेगी?

ये सवाल इसलिए अहम माना जा रहा है कि क्योंकि दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ओखला से विधायक अमानतुल्ला खान सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में रहे. नागरिकता कानून के खिलाफ शाहीन बाग में हो रहे प्रदर्शन के बहाने बीजेपी ने हर मौके पर अमानतुल्ला को निशाने पर लिया. इस सबके बावजूद अमानतुल्ला ने जबरदस्त जीत हासिल की.

अमानतुल्ला ने किया ध्वस्त

ओखला विधानसभा सीट पर अमानतुल्ला के सामने बीजेपी के टिकट पर ब्रह्म सिंह और कांग्रेस के टिकट पर परवेज हाशमी लड़ रहे थे. लेकिन अमानतुल्ला ने अपने दोनों विरोधियों को धराशाई कर दिया. अमानतुल्ला ने बीजेपी के ब्रह्म सिंह को 71827 मतों से हराया. अमानतुल्ला खान को कुल 130367 वोट हासिल हुए, जबकि ब्रह्म सिंह महज 58499 वोट ले पाए. परवेज हाशमी को 5107 वोट मिले.

अमानतुल्ला की ये जीत उनकी अपनी 2015 की जीत से भी ज्यादा असरदार रही. 2015 में आम आदमी पार्टी की जबरदस्त लहर थी और कांग्रेस भी मजबूती से चुनाव लड़ रही थी. उस स्थिति में अमानतुल्ला खान  64532 वोटों से जीतकर विधायक बने थे. लेकिन इस बार जहां अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के तमाम दिग्गज नेताओं की जीत का अंतर काफी कम हुआ है, वहीं अमानतुल्ला खान के सामने उनके विरोधी उम्मीदवार काफी पिछड़ गए.

ऐसे में ये चर्चा होने लगी है कि क्या अमानतुल्ला खान को कैबिनेट में जगह दी जाएगी, क्योंकि 2015 में भी उन्हें सरकार से दूर रखते हुए वक्फ बोर्ड की जिम्मेदारी दी गई. हालांकि, दिल्ली कैबिनेट में मुख्यमंत्री के अलावा सिर्फ 6 विधायकों को ही जगह मिल सकती है. केजरीवाल की मौजूदा कैबिनेट में मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन, इमरान हुसैन, कैलाश गहलोत, राजेंद्र पाल गौतम और गोपाल राय हैं. दिलचस्प बात ये है कि इन सभी नेताओं ने अपने-अपने चुनाव जीत लिए हैं.

इनके अलावा कुछ ऐसे नए चेहरे भी चुनाव जीतकर आए हैं जिनका कद काफी बड़ा है. इनमें आतिशी, राघव चड्ढा और दिलीप पांडे के नाम शामिल हैं.

ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार केजरीवाल के सामने कैबिनेट का गठन करना भी एक बड़ी चुनौती होगी. लेकिन एक मुस्लिम मंत्री के रूप में क्या फिर से इमरान हुसैन पर केजरीवाल भरोसा जताएंगे या अमानतुल्ला को मौका दिया जाएगा, ये देखना दिलचस्प होगा.