आगबबूला हुआ अमेरिका, कहा- चीन का व्यवहार धूर्त देशों जैसा, श्रेष्ठता क्रम के लिए खतरा

म्यूनिख। अमेरिका ने कहा है कि चीन दुनिया के श्रेष्ठता क्रम (World Order) के लिए खतरा पैदा कर रहा है। इसके लिए वह पश्चिमी देशों की जानकारियों की चोरी और छोटे पड़ोसियों को धमकाने से बाज नहीं आ रहा। चीन फायदा उठाने के लिए हर तरीका अपना रहा है, इसके लिए कोई भी मूल्य चुका रहा है। यह बात अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने जर्मन शहर म्यूनिख में सुरक्षा मामलों पर हो रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कही है।

चीन के कटु आलोचक एस्पर ने रूस, उत्तर कोरिया और ईरान की तरह से चीन को भी खतरनाक देश करार दिया। कहा, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय चीन को भी धूर्त देश मानता है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अभूतपूर्व गति से गलत दिशा में बढ़ रही है। वह अपने लोगों का उत्पीड़न कर रही है। गलत आर्थिक तौर-तरीकों का इस्तेमाल कर रही है। लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए भरपूर मनमानी कर रही है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह कि वह अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सैन्य ताकत बढ़ा रही है।

एस्पर ने कहा, अमेरिका चीन के साथ टकराव नहीं चाहता। वह कम्युनिस्ट देश के साथ बेहतर रिश्ते चाहता है। इसीलिए अमेरिका ने कोरोना वाइरस से जूझ रहे चीन की मदद के लिए वहां चिकित्सकीय सामग्री की आपूर्ति बढ़ा दी है। बावजूद इसके चीन अपनी दीर्घकालिक रणनीति में बदलाव को तैयार नहीं है। इसलिए यूरोप और बाकी दुनिया के देशों को चीन के खतरे से लड़ने के लिए खड़े होना पड़ेगा। कम्युनिस्ट पार्टी और उसकी शाखाएं, इनमें चीनी सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी भी शामिल है, देश की सीमा से बाहर अपनी गतिविधियां बढ़ा रही हैं।

यूरोप सहित दुनिया के प्रमुख इलाकों में वे किसी भी तरह से और कोई भी मूल्य चुकाकर अपना उद्देश्य पूरा करना चाह रही हैं। चीन का उद्देश्य 2035 तक अपनी सेना का पूरी तरह से आधुनिकीकरण करना है और इसके बाद 2049 तक वह एशिया पर अपना एकछत्र राज्य कायम करना चाहता है। तब वह दुनिया की अग्रणी सैन्य ताकत बनने की इच्छा रखता है। हम चीन से सामान्य व्यवहार चाहते हैं। इसके लिए चीनी सरकार को अपनी नीतियां और व्यवहार बदलना होगा।