डोनाल्ड ट्रंप के टूर से पहले CCS का बड़ा फैसला, अमेरिका से मल्टीरोल हेलीकॉप्टर खरीदेगा भारत

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर आने से ठीक पहले बुधवार को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीएस) ने नौसेना के लिए 24 मल्टीरोल हेलीकॉप्टर सौदे की मंजूरी दे दी. भारत सरकार रणनीतिक रूप से काफी अहम ये हेलीकॉप्टर अमेरिका से खरीदेगी. राष्ट्रपति ट्रंप के भारत दौरे के दौरान इस सौदे पर मुहर लग सकती है. ये हेलीकॉप्टर नौसेना के जंगी बेड़े में शामिल किए जाएंगे जो पनडुब्बियों पर हमले के लिए हथियारों से लैस होंगे.

भारत में तैयारियां तेज

राष्ट्रपति ट्रंप, उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप और अमेरिकी प्रशासन के एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के स्वागत के लिए नई दिल्ली, आगरा और अहमदाबाद में जोर-शोर से तैयारियां की जा रही हैं. ट्रंप और उनकी पत्नी अहमदाबाद से अपनी बहुप्रतीक्षित भारत यात्रा शुरू करेंगे, जहां वे नवनिर्मित मोटेरा क्रिकेट स्टेडियम में “नमस्ते ट्रंप” कार्यक्रम में भाग लेंगे. इस आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहेंगे. ट्रंप के इसी दौरे के दौरान हेलीकॉप्टर सौदे के हरी झंडी दिए जाने की उम्मीद है.

2 साल में मिलेगी पहली खेप

सूत्रों की मानें तो आधिकारिक तौर पर रक्षा, व्यापार और रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने के मकसद से राष्ट्रपति ट्रंप की लगभग 36 घंटे की निर्धारित यात्रा के दौरान भारत और अमेरिका के बीच तकरीबन 2.5 अरब डॉलर के 24 नौसैनिक हेलिकॉप्टरों की खरीद का समझौता हो सकता है. जहां तक व्यापार समझौते की बात है तो सूत्रों ने कहा है कि भारत सरकार को इस पर कोई जल्दी नहीं है क्योंकि इसके दूरगामी परिणाम होंगे, जबकि सरकार छोटी अवधि के लिए कोई निर्णय लेने के पक्ष में नहीं है.

ANI

@ANI

Government sources: Ahead of US President Donald Trump‘s visit to India, the Cabinet Committee on Security today cleared the acquisition of 24 MH-60 Romeo multi-role helicopters worth around USD 2.5 billion for the Indian Navy from the US.

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सूत्रों के मुताबिक, इस समझौते के तहत भारत 24 MH-60R के लिए शुरुआती 15 फीसदी किस्त का भुगतान करेगा. समझौता होने के बाद हेलीकॉप्टर की पहली खेप 2 साल में आएगी. सभी हेलीकॉप्टर 2 से 5 साल में भारत को मिल जाएंगे. इसके साथ ही दोनों देशों के बीच इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम खरीदने पर भी चर्चा हो सकती है. इसे दिल्ली को बेहद सुरक्षित बनाने के लिए खरीदने की योजना है. हालांकि, इस समझौते में पेंच फंसता दिख रहा है, क्योंकि यह डील करीब 9,000 करोड़ रुपये (1.90 अरब डॉलर) की होगी.