’10 साल तक PM मनमोहन सिंह की सरकारी फ़ाइलें सोनिया के यहाँ जाती थीं’ – किताब में खुलासा

नई दिल्‍ली। दिवंगत पत्रकार और पद्म भूषण से सम्मानित कुलदीप नैयर की अंतिम किताब “ऑन लीडर्स एंड आइकन्स: जिन्ना से मोदी तक” का विमोचन शुक्रवार को हुआ। ख़बर यह है कि इस पुस्तक विमोचन समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शिरक़त नहीं की।

वहीं, कुलदीप नैयर के पुस्तक विमोचन में देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने न्यूयॉर्क से वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए हिस्सा लिया। जेटली ने इस कार्यक्रम में दिवंगत पत्रकार को देश के पिछले 6-7 दशक में देश के सबसे प्रसिद्ध पत्रकारों में से एक बताया।

दरअसल, मनमोहन सिंह ने कुलदीप नैयर की किताब में ज़िक्र किए गए कुछ हिस्से को लेकर आपत्ति ज़ाहिर की है और इस संबंध में उन्होंने दिवंगत नैयर की पत्नी भारती को एक पत्र लिखा।

इस किताब के एक हिस्से में इस बात का उल्लेख है कि मनमोहन सिंह के कार्यकाल में ‘सरकारी फ़ाइलें 10 जनपथ जाती थीं’ इस पर आपत्ति दर्ज करते हुए सिंह ने नैयर की पत्नी को लिखे पत्र में कहा कि किताब में उल्लेखित यह बात सच नहीं है और यह जानने के बावजूद उनके लिए विमोचन में शामिल होना शर्मनाक होगा।

मनमोहन सिंह के समारोह से दूरी बनाने के बाद दिवंगत पत्रकार के बेटे राजीव नैयर ने बताया कि उनके पिता को विवादों में बने रहना पसंद था और सिंह ने ख़ुद ही इस विवाद को जन्म दिया है क्योंकि किताब में वही बात लिखी गई हैं जो उन्होंने ख़ुद उनके दिवंगत पिता से कही थीं। लेकिन अब किताब पढ़ने के बाद वो इस बात को नकार रहे हैं।

राजीव ने 1 फरवरी को पूर्व पीएम द्वारा भेजे गए पत्र को पढ़ा। इसमें मनमोहन सिंह ने लिखा था कि इस किताब को पढ़ने के दौरान पेज 172 पर एक संदर्भ मिला कि उनके प्रधानमंत्रित्व काल में सरकार की फ़ाइलें सोनिया गाँधी के घर पर जाती थीं। यह कथन सत्य नहीं है, क्योंकि कुलदीप नैयर ने कभी भी इस तरह की कोई बातचीत उनसे नहीं की।

कार्यक्रम के बाद पत्रकार राजदीप सरदेसाई और कॉन्ग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के बीच चर्चा हो रही थी। इस बातचीत में कपिल सिब्बल ने कहा कि जब वो मंत्री थे तो वे सभी फ़ैसले सीधे ले सकते थे। 10 साल पद पर रहने के बावजूद न तो उन्हें कभी पीएम ने फ़ोन ही किया और न ही कभी किसी फ़ाइल के सिलसिले में 10 जनपथ से फ़ोन आया।

इसके बाद सिब्बल ने कहा कि कभी-कभी ऐसा होता है कि जानकारियाँ बाहर आती हैं, लेकिन यह ज़रूरी नहीं कि वो सच ही हों। हालाँकि फिर उन्होंने दिवंगत नैयर पर सकारात्मक रुख़ अपनाते हुए कहा कि हमें उनके दृष्टिकोण की सराहना करनी चाहिए और उनसे सीख भी लेनी चाहिए।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए अरुण जेटली ने कहा कि दिवंगत पत्रकार नैयर, देश के सम्मानित पत्रकारों में से एक थे। उनसे सहमति या असहमति हो सकती है लेकिन पिछले 60-70 सालों में उनसे बेहतर राजनीतिक रिपोर्टर शायद कोई नहीं हुआ।