योगी सरकार के ‘हॉटस्पॉट’ मॉडल ने भी दूसरे राज्यों को दिखाई उम्मीद

लखनऊ । कोरोना पर काबू के प्रयासों में यदि राजस्थान का भीलवाड़ा मॉडल चर्चा में है तो अब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के ‘हॉटस्पॉट’ मॉडल ने भी दूसरे राज्यों को उम्मीद दिखाई है। यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार का दावा है कि हॉटस्पॉट की रणनीति कारगर है। साथ ही यह भी संतोष है कि जनसंख्या के लिहाज से यूपी में कोरोना के मामले कम हैं। शनिवार को नई दिल्ली में स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कोरोना से जंग में आगरा में लागू की गई व्यवस्था को रोल मॉडल बताया।

उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के हालात की जानकारी अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने लखनऊ में लोकभवन में पत्रकारों से साझा की। उन्होंने बताया कि यूपी में कोरोना से निपटने के लिए बनाई गई हॉटस्पॉट व्यवस्था की पूरे देश में प्रशंसा हो रही है। हॉटस्पॉट को लेकर जो रणनीति लगभग चार दिन पहले यहां लागू की गई है, उसे अन्य प्रदेशों ने भी लागू किया है। यह रणनीति काफी कारगर सिद्ध हुई है।

दूसरे चरण में 55 हॉटस्पॉट, बढ़ सकता है लॉकडाउन

उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लॉकडाउन को लेकर कोई घोषणा कर सकते हैं। अभी कोई निर्णय तो नहीं लिया गया है, लेकिन जिस तरह से मामले बढ़ रहे हैं और सरकार हॉटस्पॉट बढ़ाकर सख्ती बढ़ा रही है, उससे उम्मीद है कि लॉकडाउन की अवधि यहां जरूर बढ़ा दी जाएगी। अपर प्रमुख सचिव गृह ने बताया कि जहां कोरोना के मरीज मिल रहे हैं, उन क्षेत्रों को हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित कर सील किया जा रहा है। दूसरे चरण में ऐसे 55 स्थान चिह्नित करने के साथ ही कार्रवाई शुरू की गई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में एक दिन में कुल 10,398 लोगों का टेस्ट किया गया है, जो रिकॉर्ड है। इनमें से 9950 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव है।

दिल्ली ने भी सराहे आगरा के इंतजाम 

उत्तर प्रदेश में सबसे पहले आगरा जिले में छह अप्रैल को 22 हॉस्टस्पॉट बनाए गए थे। वर्तमान में इनकी संख्या 29 है। शनिवार को स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने नई दिल्ली में आगरा को रोल मॉडल बताकर खुलकर तारीफ की। संयुक्त सचिव ने कहा कि इटली से घूमकर आगरा आए एक परिवार के सदस्यों में सबसे पहले कोरोना की पुष्टि हुई थी। पुलिस-प्रशासन ने उनकी पूरी ट्रैवल हिस्ट्री की जांच के साथ ही तीन किमी. को कंटेंटमेंट और पांच किलोमीटर को बफर जोन में बदला गया। साथ ही 1248 मेडिकल टीमों का गठन कर नौ लाख लोगों का सर्वे किया गया जिसमें 2500 लोग खांसी, जुकाम और बुखार से पीडि़त मिले। जिन पर लगातार नजर रखी जा रही है।

यह है हॉट स्पॉट व्यवस्था

  • जिस क्षेत्र में कोरोना पॉजिटिव केस मिलता है, उसे पूरे क्षेत्र की बैरिकेडिंग कर अंदर आने-जाने के रास्ते बना दिए जाते हैं।
  • हॉट स्पॉट क्षेत्रों में कोई घर से नहीं निकल सकता। स्वास्थ्य, सफाई, आवश्यक वस्तु की डोर टू डोर स्टेप डिलीवरी वाले कर्मी ही आ-जा सकते हैं।
  • प्रत्येक हॉट स्पॉट के लिए एक मजिस्ट्रेट और एक पुलिस अधिकारी नामित कर दिया गया है।
  • पानी में दवा डालकर पूरे क्षेत्र को फायर ब्रिगेड के माध्यम से सेनिटाइज किया जा रहा है।
  • कोरोना संक्रमित रोगी के संपर्क में आए सभी प्राइमरी और सेकेंड्री कांटेक्ट की टेस्टिंग की जा रही है।
  • यदि कोई व्यक्ति बाहर निकलता है तो धारा 188 के तहत चालान, वाहन का भी चालान कर जब्त किया जा रहा है।
  • क्षेत्र के हर मकान और उसमें रहने वालों के रिकॉर्ड की जांच और निगरानी की जा रही है।