कोरोना वायरस: महामारी से निपटने के लिए सेना उतार सकता है रूस

मॉस्को। कोरोना वायरस (Coronavirus) से निपटने के प्रयासों के तहत रूस (Russia) सेना को मैदान में उतार सकता है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसके संकेत दिए हैं. वीडियो कान्फ्रेंसिंग में पुतिन ने कुछ हफ्ते पहले रूस द्वारा इटली, अमेरिका और साइबेरिया को भेजी चिकित्सीय सहायता (जिसमें मेडिकल सामान के साथ-साथ सैन्य चिकित्सक भी शामिल थे) का जिक्र करते हुए कि अधिकारियों से कहा कि कोरोना महामारी से निपटने के लिए सेना की सहायता लेने पर विचार करें.

गौरतलब है कि रूस द्वारा अमेरिका को सहायता मुहैया कराए जाने को लेकर पुतिन विरोधियों ने तीखी नाराजगी जताई थी. उनका कहना था कि सरकार अपने मूल्यवान संसाधन दूसरों पर लुटा रही है, जबकि उसके अपने क्षेत्र इसकी कमी का सामना कर रहे हैं. इसके जवाब में मॉस्को की तरफ से कहा गया था कि अब वह भविष्य में अमेरिका से मदद की अपेक्षा कर सकता है.

अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि आपको इस अनुभव का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए और रक्षा मंत्रालय के विकल्प के साथ इस बात को अपने दिमाग में रखना चाहिए कि यदि जरुरत पड़ी तो इन सभी विकल्पों को शामिल किया जा सकता है और करना चाहिए. उन्होंने आए कहा कि सेना द्वारा प्रदर्शित संसाधन रक्षा मंत्रालय के संसाधनों का केवल एक अंश हैं और भविष्य के लिए उसके पास पर्याप्त संसाधन हैं.

उल्लेखनीय है कि रूस में कोरोना के मामलों में इजाफा होता जा रहा है. सोमवार को 2,558 मामले सामने आए, जिससे संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 18,328 हो गई है. वहीं, मरने वालों का आंकड़ा 148 तक जा पहुंचा है. हालांकि, अमेरिका और इटली के मुकाबले यह आंकड़ा कम है. सबसे ज्यादा प्रभावित मॉस्को है, कई अन्य क्षेत्रों में भी लॉकडाउन लगाया है. लोगों को यहां केवल खाद्य सामग्री, दवाएं आदि खरीदने के लिए ही घरों से बाहर निकलने की इजाजत है.

अनुमति के लिए नई वेबसाइट की लॉन्च
इस बीच, मॉस्को ने सोमवार को एक नई वेबसाइट लांच की है. इस साइट की मदद से लोग सार्वजानिक परिवहन या अपने निजी वाहन के इस्तेमाल के लिए अनुमति हासिल कर सकेंगे. हालांकि, शुरुआत के साथ ही साइट में परेशानियां आने लगी हैं. अधिकारियों का कहना है कि हैकिंग जैसी गतिविधियों के चलते ऐसा हो रहा है. उनका यहां तक कहना है कि हैकर विदेशों में बैठकर साइट को निशाना बना रहे हैं. वहीं, मॉस्को के संकट प्रतिक्रिया केंद्र के मुताबिक, लोगों को काम पर जाने के लिए निजी या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के लगभग 700,000 परमिट सफलतापूर्वक जारी किये गए हैं.