दुनिया पर कोरोना का कहर जारी, मगर चीन की बेफिक्री पर सब हैरान

नई दिल्ली। पूरी दुनिया में कोरोना वायरस चीन से फैला है. अब वही चीन कोरोना के मामलों को दिखाने वाले चार्ट में सातवें नंबर पर है. जबकि अमेरिका में उससे 9 गुना और यूरोप के 4 देशों में उससे दोगुना से ज़्यादा कोरोना के मामले अब तक सामने आए हैं. लिहाज़ा चीन के ऊपर दुनिया का शक और दबाव बढ़ने लगा कि वो बताए, आखिर उसने ऐसा क्या किया, जिससे वो कोरोना के कहर से इतनी जल्दी उबर गया? और इसी दबाव के बीच चीन ने मौत के आंकड़े की एक नई लिस्ट जारी कर दी.

कोरोना वायरस जैसे-जैसे विकराल रूप लेता जा रहा है. वैसे वैसे दुनिया का गुस्सा भी चीन के लिए बढ़ता जा रहा है. अब एक-एक कर दुनिया इस महामारी के लिए चीन पर इल्ज़ाम लगाने लगी है. सवाल वाजिब भी है कि जिस कोरोना से सब जूझ रहे हैं. उस कोरोना से चीन इतना बेफिक्र कैसे है.

बाकी दुनिया के मुकाबले चीन में कोरोना वायरस के इतने कम मामलों की दो ही वजह हो सकती हैं या तो उसने अपने यहां आए कोरोना के मरीज़ों पर कोई ऐसी दवा इस्तेमाल की जो बाकी दुनिया के पास नहीं है. या फिर वो अपने यहां कोविड-19 से हुई मौतों का आंकड़ा छुपा रहा है. मगर जैसे ही इस बात को लेकर चीन पर दुनिया का दबाव बढ़ने लगा. वैसे ही वुहान से अचानक 1290 लोगों के मारे जाने की खबर आ गई. जहां अब तक कोरोना संक्रमण के इक्के दुक्के मामले ही सामने आ रहे थे.

हालांकि चीन में कोरोना से हुई मौतों के आंकड़े छुपाने को लेकर कई अलग-अलग थ्योरी पहले भी सामने आ चुकी हैं. खुद अमेरिकी राष्ट्रपति कह रहे हैं कि भले चीन ने मौतों का आंकड़ा बढ़ा दिया हो. लेकिन असल में ये अमेरिका में हो रही मौतों के आंकड़े से भी कहीं ज़्यादा है.

आपको बता दें कि 17 अप्रैल को चीन के वुहान में अचानक कोविड-19 से होने वाली मौतों के आंकड़े को 50 फीसदी तक बढ़ा दिया गया. जिससे चीन में कोरोना से मरने वालों की तादाद 17 अप्रैल को बढ़ कर 4632 हो गई. जबकि 16 अप्रैल तक यहां मौत का आंकड़ा 3869 था.

एक तरफ जहां दुनिया चीन पर कोरोना से हुई मौतों के आंकड़े को छुपाने का आरोप लगा रही है. वहीं चीन का कहना है कि जेलों और मुर्दाघरों में मौतों के बारे में रखी गई रिपोर्ट से जो नया डेटा मिला है, उसी के आधार पर नए आंकड़े जारी किए गए हैं. चीन में मौतों के आंकड़ों की ये ख़बर ऐसे वक्त पर आई है, जब वहां के आर्थिक विकास के आंकड़ों में गिरावट की घोषणा हुई. इस वजह से कुछ जानकारों का मानना है कि मुमकिन है कि चीन जानबूझकर ये खबर छिपाना चाहता हो. हालांकि ये पूरी तरह सिर्फ एक इत्तेफाक भी हो सकता है.