इरफान की थी क्रिकेटर बनने की तमन्ना, इस एक झूठ के चलते बन गए एक्टर

स्टार एक्टर इरफान खान का मुंबई स्थित कोक‍िलाबेन अस्पताल में बुधवार निधन हो गया. कुछ समय पहले ही उनकी मां का निधन हुआ है और इरफान खुद कैंसर का इलाज कराकर कुछ समय पहले विदेश से लौटे थे. लॉकडाउन में घर से दूर होने के कारण एक्टर ने वीडियो कॉन्फ्रेस‍िंग के जरिए मां के अंतिम दर्शन किए थे.

अपनी शानदार एक्टिंग के चलते लोकप्रियता हासिल कर चुके इरफान ना केवल बॉलीवुड बल्कि हॉलीवुड में भी जबरदस्त नाम कमा चुके हैं. हालांकि बचपन में वे एक्टर बनना ही नहीं चाहते थे. दरअसल राजस्थान में पैदा हुए इरफान को क्रिकेट खेलना बहुत पसंद था. वो अपने पड़ोस में और चौगान स्टेडियम में जाकर क्रिकेट खेलना पसंद करते थे.

इरफान को स्कूल जाना पसंद नहीं था और क्रिकेट की प्रैक्टिस करना अच्छा लगता था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इरफान खान क्रिकेट में इतने अच्छे थे कि उनका चयन सीके नायडू ट्रॉफी के लिए लगभग हो गया था. लेकिन पैसों की तंगी और परिवारवालों की बेरुखी के चलते उनका क्रिकेटर बनने का सपना अधूरा रह गया था.

कुछ यूं हुआ था इरफान का एनएसडी में सेलेक्शन

कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा यानि एनएसडी के लिए अप्लाई किया. एनएसडी में पहली बार में एडमिशन पाना मुश्किल माना जाता है लेकिन इरफान को पहली बार में ही एनएसडी में प्रवेश मिल गया. हालांकि, इरफान को एनएसडी में दाखिले के लिए झूठ भी बोलना पड़ा था. दरअसल इस संस्थान में एडमिशन के लिए कम से कम 10 ड्रामा नाटकों का अनुभव होना चाहिए लेकिन इरफान के पास इतना अनुभव नहीं था.

उन्होंने एनएसडी के टीचर्स को अपने हिसाब से नाटकों के नाम गिनवा दिए थे. शायद ये इरफान की बॉडी लैंग्वेज और उनकी अभिनय करती आंखों का ही नतीजा था कि वे टीचर्स को मनाने में कामयाब रहे थे. इरफान के एनएसडी में प्रवेश के दिनों में ही उनके पिता का देहांत हो गया था. इसके बाद इरफान को घर से पैसे मिलने बंद हो गए. एनएसडी से मिलने वाली फेलोशिप के जरिए उन्होंने अपना कोर्स पूरा किया था.