‘अभी लड़ाई कोरोना के खिलाफ है, हमें सरकार को उखाड़ फेंकने में कोई दिलचस्पी नहीं, यह अंतर्विरोधों से गिर जाएगा’

मुंबई। महाराष्ट्र के दिग्गज नेताओं के राज्यपाल के राजभवन दौरे के बाद राज्य में एक बार फिर से राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। इस बीच भाजपा नेता और महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार (मई 26, 2020) को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि राज्य में गलत प्रचार किया जा रहा है और केंद्र सरकार के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। केंद्र सरकार की छवि धूमिल की जा रही है। फडणवीस ने कहा कि कोरोना की इस स्थिति में केंद्र अलग-अलग तरीकों से मदद कर रहा है। केंद्र ने राहत पैकेज का किया ऐलान किया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान फडणवीस ने केंद्र सरकार द्वारा महाराष्ट्र को प्रदान की गई आर्थिक सहायता की राशि के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्र गरीबों को सस्ते खाद्यान्न की आपूर्ति कर रहा है। केंद्र ने 4,592 करोड़ रुपए के खाद्यान्न प्रदान किए। केंद्र ने श्रमिकों के शिविरों के लिए भुगतान किया है। रेलवे श्रमिकों के लिए लगभग 300 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। फडणवीस ने कहा कि केंद्र ने राज्य को 28,104 करोड़ रुपए की सहायता प्रदान की है।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र को केंद्र से कुल 2 लाख 70 हजार करोड़ मिल रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि केंद्र पीपीई किट, मास्क, राशन, प्रवासी श्रमिकों के किराए का खर्च आदि देकर विभिन्न तरीकों से सहायता प्रदान कर रहा है। केंद्र सरकार ने राज्य को 10 लाख पीपीई किट प्रदान किए। लगभग 16 लाख N95 मास्क दिए। इसके अलावा, चिकित्सा उपकरणों की खरीद के लिए राज्य को 448 करोड़ रुपए प्रदान किए गए।

Evaluation of taxation के तहत केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किए गए धन में से 41 प्रतिशत राज्यों को जाता है। प्रत्येक राज्य का अपना हिस्सा है। महाराष्ट्र का करों का हिस्सा 1148 करोड़ रुपए था। लेकिन केंद्र ने 5,648 करोड़ रुपए दिए। इसका मतलब है कि 4,500 करोड़ रुपए अधिक दिए गए। इसलिए ये नहीं कहा जा सकता कि पैसे के अभाव में मजदूरों की मदद नहीं की गई। कर्नाटक, गुजरात और कॉन्ग्रेस शासित राज्य छत्तीसगढ़ ने भी मदद की  है।

फडणवीस ने कहा, “राज्य सरकार को केंद्र द्वारा प्रदान की जाने वाली आर्थिक सहायता खर्च करना बाकी है। मैं वास्तव में यह नहीं समझ पा रहा हूँ कि राज्य सरकार की प्राथमिकता क्या है, आज राज्य को मुखर नेतृत्व की आवश्यकता है, मुझे उम्मीद है कि उद्धव जी साहसिक निर्णय लेंगे।”

राज्य में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम 35,000 करोड़ रुपए तक का ऋण ले सकते हैं। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत 1,726 करोड़ रुपए प्रदान किए। जनधन योजना के तहत, अब तक महिलाओं के खातों में 1308 करोड़ रुपए जमा किए गए हैं। इसके अलावा, अन्य 650 करोड़ रुपए एकत्र किए जा रहे हैं।

विकलांगों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 16 करोड़ रुपए और 3800 करोड़ रुपए सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा किए गए हैं। केंद्र सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त गैस सिलेंडर देने का फैसला किया।

आगे उन्होंने कहा, “वर्तमान में लड़ाई कोरोना के खिलाफ है। हमें सरकार को उखाड़ फेंकने में कोई दिलचस्पी नहीं है। यह अपने अंतर्विरोधों के माध्यम से खुद गिर जाएगा।”

वर्तमान में ऐसी खबरें कोरोना की लड़ाई से ध्यान हटाने के लिए दी जा रही हैं। सरकार में कोई समन्वय नहीं है। यदि हम इस अवधि के दौरान किए गए कार्यों को देखते हैं, तो यह देखना आसान है कि इस सरकार की प्राथमिकता क्या है?

इसके साथ ही उन्होंने राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए कहा, “राहुल गाँधी का आज का बयान बहुत गंभीर है। यह एक ऐसा बयान है जो अपनी जिम्मेदारी से भागता है। उनके बयान से कॉन्ग्रेस पार्टी मुख्यमंत्री और शिवसेना पर दोष मढ़ने की कोशिश कर रही है।”

दरअसल, राहुल गाँधी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में साफ किया कि महाराष्‍ट्र सरकार को कॉन्ग्रेस सपोर्ट कर रही है, मगर वहाँ के बड़े फैसलों में पार्टी की भूमिका नहीं है। यह कहकर राहुल ने ‘महाविकास अघाडी’ (MVA) की एकजुटता को लेकर अटकलों को हवा दे दी। राहुल ने कहा, “हम महाराष्‍ट्र में सरकार को सपोर्ट कर रहे हैं मगर वहाँ के डिसिजन मेकर नहीं हैं। हम पंजाब, छत्‍तीसगढ़, राजस्‍थान, पुदुचेरी में डिसिजन मेकर हैं। सरकार चलाने और सरकार का सपोर्ट करने में फर्क होता है।”