‘राम नेपाल के, रावण श्रीलंका का… और भारत बंदरों का देश’ – देवदत्त पटनायक ने किया हनुमान और भैरव का अपमान

हिन्दू धर्म-ग्रंथों पर दर्जनों किताबें लिख कर खुद को माइथोलॉजी विशेषज्ञ बताने वाले देवदत्त पटनायक ने एक बार फिर से सोशल मीडिया पर अपनी हिन्दू घृणा को प्रदर्शित किया है। हिन्दूफोबिया से ग्रसित देवदत्त पटनायक ने इस बार हनुमान का मजाक बनाया है।

देवदत्त पटनायक ने एक तरफ नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के उस बयान को आगे बढ़ाया, जिसमें उन्होंने श्रीराम के नेपाल में जन्म लेने की बात कही थी, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने भारत को बंदरों का देश करार दिया। ये सब करने के लिए उन्होंने रामायण का सहारा लिया।

देवदत्त पटनायक, जिन्हें सोशल मीडिया पर कुछ लोग देवदत्त ‘नालायक’ भी कहते हैं, ने ट्विटर पर लिखा कि रामायण के बारे में जो नई बातें सामने आ रही हैं, उसने हिंदुत्व ब्रिगेड को आक्रोशित और बेचैन कर दिया है। उन्होंने लिखा कि भगवान श्रीराम नेपाल के थे और रावण श्रीलंका का था। साथ ही आगे लिखा कि भारत बंदरों का देश है।

इस ट्वीट के साथ देवदत्त पटनायक ने भगवान हनुमान का चित्र डाला, जो बताता है कि वो उनका अपमान करने के लिए ऐसा कर रहे हैं। लोगों ने उनके इस ट्वीट की जम कर निंदा की।

देवदत्त पटनायक ने एक अन्य ट्वीट में भैरव का भी अपमान किया। उन्होंने लिखा कि हिंदुत्व के लोग कहते हैं कि हम सब मूर्ख हैं, तब भी हमारे पर हँसो मत। इसके बाद उन्होंने अजीबोगरीब दावा किया कि हिन्दू धर्म में हँसने को डरावना बताया गया है। इसके बाद उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि भैरव के अट्टहास से तो विज्ञान की राहें खुल जाती हैं।

इस ट्वीट के साथ उन्होंने भैरव का चित्र भी लगाया। बता दें कि हिन्दू धर्म में काल भैरव की अधिकतर तंत्र साधना करने वालों द्वारा पूजा की जाती है और उन्हें भगवान शिव से जोड़ कर देखा जाता है।

देवदत्त पटनायक लोगों की आलोचना से इतना डर गए कि उन्होंने अपनी इस दोनों ट्वीट्स में रिप्लाइज को भी ऑफ कर दिया, अर्थात कोई भी उनके इस ट्वीट का जवाब नहीं दे सकता। आलोचना से डरते हुए उन्होंने ऐसा किया।

सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा कि हिंदुत्व पर कई मोटी-मोटी किताबें लिखने वाला आज एक सवाल से भी भाग रहा है और आलोचना को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है। हिन्दू घृणा फैलाने में लगे देवदत्त पटनायक आए दिन इस तरह के ट्वीट्स कर के हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाते रहते हैं।

इससे पहले पटनायक ने कहा था कि हिंदुत्व यह मानता है कि सीता को क़ैद में रखने के लिए लक्ष्मण रेखा बनाई गई थी जबकि हिंदुइज्म कहता है कि रावण को रोकने के लिए लक्ष्मण रेखा बनाई गई थी। देवदत्त पटनायक ने ऐसा ट्वीट कर हिंदुत्व पर निशाना साधा था। इसके बाद लोगों ने उन्हें उनका ही एक पुनारा ट्वीट याद दिला दिया था, जिसमें उन्होंने लक्ष्मण रेखा से जुड़ी कहानी को ही काल्पनिक करार दिया था।

देवदत्त पटनायक सोशल मीडिया पर माँ-बहन की गालियाँ देने के लिए भी जाने जाते हैं। एक बार सवाल पूछने वाले को जवाब देते हुए देवदत्त पटनायक ने अजीबोगरीब भाषा का इस्तेमाल किया था। उन्होंने लिखा था कि उन्होंने आज ही अपनी माँ (जो मर चुकी हैं) से बात की है और वह बिलकुल खुश हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया था कि उनके सभी पूर्वज स्वर्ग में हैं और हँसी-ख़ुशी हैं। उन्होंने ट्विटर यूजर को लिखा था कि तुम्हारे सारे पूर्वक नरक में बिलख-बिलख कर रो रहे हैं।

हिन्दू धर्म-ग्रंथों पर दर्जनों किताबें लिख कर खुद को माइथोलॉजी विशेषज्ञ बताने वाले देवदत्त पटनायक ने एक बार फिर से सोशल मीडिया पर अपनी हिन्दू घृणा को प्रदर्शित किया है। हिन्दूफोबिया से ग्रसित देवदत्त पटनायक ने इस बार हनुमान का मजाक बनाया है।

देवदत्त पटनायक ने एक तरफ नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के उस बयान को आगे बढ़ाया, जिसमें उन्होंने श्रीराम के नेपाल में जन्म लेने की बात कही थी, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने भारत को बंदरों का देश करार दिया। ये सब करने के लिए उन्होंने रामायण का सहारा लिया।

देवदत्त पटनायक, जिन्हें सोशल मीडिया पर कुछ लोग देवदत्त ‘नालायक’ भी कहते हैं, ने ट्विटर पर लिखा कि रामायण के बारे में जो नई बातें सामने आ रही हैं, उसने हिंदुत्व ब्रिगेड को आक्रोशित और बेचैन कर दिया है। उन्होंने लिखा कि भगवान श्रीराम नेपाल के थे और रावण श्रीलंका का था। साथ ही आगे लिखा कि भारत बंदरों का देश है।

इस ट्वीट के साथ देवदत्त पटनायक ने भगवान हनुमान का चित्र डाला, जो बताता है कि वो उनका अपमान करने के लिए ऐसा कर रहे हैं। लोगों ने उनके इस ट्वीट की जम कर निंदा की।

देवदत्त पटनायक ने एक अन्य ट्वीट में भैरव का भी अपमान किया। उन्होंने लिखा कि हिंदुत्व के लोग कहते हैं कि हम सब मूर्ख हैं, तब भी हमारे पर हँसो मत। इसके बाद उन्होंने अजीबोगरीब दावा किया कि हिन्दू धर्म में हँसने को डरावना बताया गया है। इसके बाद उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि भैरव के अट्टहास से तो विज्ञान की राहें खुल जाती हैं।

इस ट्वीट के साथ उन्होंने भैरव का चित्र भी लगाया। बता दें कि हिन्दू धर्म में काल भैरव की अधिकतर तंत्र साधना करने वालों द्वारा पूजा की जाती है और उन्हें भगवान शिव से जोड़ कर देखा जाता है।

देवदत्त पटनायक लोगों की आलोचना से इतना डर गए कि उन्होंने अपनी इस दोनों ट्वीट्स में रिप्लाइज को भी ऑफ कर दिया, अर्थात कोई भी उनके इस ट्वीट का जवाब नहीं दे सकता। आलोचना से डरते हुए उन्होंने ऐसा किया।

सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा कि हिंदुत्व पर कई मोटी-मोटी किताबें लिखने वाला आज एक सवाल से भी भाग रहा है और आलोचना को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है। हिन्दू घृणा फैलाने में लगे देवदत्त पटनायक आए दिन इस तरह के ट्वीट्स कर के हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाते रहते हैं।

इससे पहले पटनायक ने कहा था कि हिंदुत्व यह मानता है कि सीता को क़ैद में रखने के लिए लक्ष्मण रेखा बनाई गई थी जबकि हिंदुइज्म कहता है कि रावण को रोकने के लिए लक्ष्मण रेखा बनाई गई थी। देवदत्त पटनायक ने ऐसा ट्वीट कर हिंदुत्व पर निशाना साधा था। इसके बाद लोगों ने उन्हें उनका ही एक पुनारा ट्वीट याद दिला दिया था, जिसमें उन्होंने लक्ष्मण रेखा से जुड़ी कहानी को ही काल्पनिक करार दिया था।

देवदत्त पटनायक सोशल मीडिया पर माँ-बहन की गालियाँ देने के लिए भी जाने जाते हैं। एक बार सवाल पूछने वाले को जवाब देते हुए देवदत्त पटनायक ने अजीबोगरीब भाषा का इस्तेमाल किया था। उन्होंने लिखा था कि उन्होंने आज ही अपनी माँ (जो मर चुकी हैं) से बात की है और वह बिलकुल खुश हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया था कि उनके सभी पूर्वज स्वर्ग में हैं और हँसी-ख़ुशी हैं। उन्होंने ट्विटर यूजर को लिखा था कि तुम्हारे सारे पूर्वक नरक में बिलख-बिलख कर रो रहे हैं।

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