दशकों पुरानी दुश्मनी खत्म, ट्रंप ने कैसे कराई इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच 49 साल बाद दोस्ती

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नई दिल्ली। संयुक्‍त अरब अमीरात और इजरायल के बीच दशकों से चली आ रही दुश्‍मनी अब खत्‍म हो गई है। अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की मध्यस्थता ने आखिरकार पश्चिमी एशिया के तो शक्तिशाली देशों को एक साथ ला ही दिया। दरअसल, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इजराइल ने गुरुवार को उस समझौते के तहत पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित करने पर सहमति जताई, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई है। तीनों देशों का कहना है कि इससे पश्चिम एशिया क्षेत्र में शांति लाने में मदद मिलेगी और इसके तहत इजराइल वेस्ट बैंक के बड़े हिस्सों को अपने में मिलाने की योजना को स्थगित कर देगा।

एक संयुक्त बयान के अनुसार, ‘इस ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता से पश्चिम एशिया में शांति लाने में मदद मिलेगी।’ ट्रंप ने ओवल आफिस से कहा, ’49 वर्षों बाद इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात अपने राजनयिक संबंध सामान्य बनाएंगे।’

ट्रंप ने कहा, ”वे अपने दूतावासों और राजदूतों का आदान प्रदान करेंगे और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग शुरू करेंगे जिनमें पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, व्यापार और सुरक्षा शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘अब जब शुरूआत हो गई है, मैं उम्मीद करता हूं कि और अरब एवं मुस्लिम देश संयुक्त अरब अमीरात का अनुसरण करेंगे।’

इस समझौते के तहत इजराइल वेस्ट बैंक के बड़े हिस्सों को अपने में मिलाने की योजना को स्थगित कर देगा। यूएई की सरकारी समाचार एजेंसी ‘वाम ने गुरुवार को अमेरिका, इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात का एक संयुक्त बयान साझा किया।

बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस और यूएई सशस्त्र बलों के उप सुप्रीम कमांडर ने बृहस्पतिवार को बात की और इजरायल और यूएई के बीच संबंधों के पूर्ण रूप से सामान्य बनाने सहमति व्यक्त की। बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्वीट किया कि यह एक ‘ऐतिहासिक दिन है।’

बयान में कहा गया है, ‘यह ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता पश्चिम एशिया क्षेत्र में शांति को आगे बढ़ाएगी। यह तीनों नेताओं की साहसिक कूटनीति एवं दृष्टि तथा एक नया रास्ता खोलने के संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल के साहस को दिखाता है। इससे क्षेत्र में व्यापक संभावनाओं का निर्माण होगा। तीनों देशों ने एकसमान चुनौतियों का सामना किया है और आज की ऐतिहासिक उपलब्धि से वे पारस्परिक रूप से लाभान्वित होंगे।’

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