कुलभूषण जाधव केस: अपनी ही अदालत में पाकिस्तानी सरकार ने बोला यह बड़ा झूठ

इस्लामाबाद। कुलभूषण जाधव (Kulbhushan Jadhav) मामले में पाकिस्तान (Pakistan) सरकार ने अपनी ही अदालत में झूठ बोला है. इमरान खान (Imran Khan) सरकार ने मंगलवार को इस्लमाबाद हाईकोर्ट (Islamabad High Court) में कहा कि भारत ने जाधव की पैरवी के लिए वकील नियुक्त नहीं किया है. जबकि हकीकत यह है कि पाकिस्तान बार-बार भारत की तरफ से वकील नियुक्त करने की मांग को ठुकरा रहा है.

फिर ठुकराई मांग
पिछले गुरुवार को भी भारत ने मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए भारतीय वकील या क्वींस काउंसल की नियुक्ति की मांग की थी, जिसे पाकिस्तान ने खारिज कर दिया. मालूम हो कि पचास वर्षीय सेवानिवृत्त भारतीय नौसेना अधिकारी जाधव को पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने जासूसी और आतंकवाद के आरोप में अप्रैल 2017 में मौत की सजा सुनाई थी. इस्लामाबाद हाईकोर्ट इस सजा की समीक्षा कर रही है.

चीफ जस्टिस कर रहे सुनवाई
इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने पिछले महीने भारत को जाधव के लिए वकील नियुक्त करने का मौका देने की नई डेडलाइन तय की थी. चीफ जस्टिस अतहर मीनाल्लाह (Chief Justice Athar Minallah) की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को इस मामले की सुनवाई की. इस दौरान, सरकार ने अदालत में झूठ बोलते हुए कहा कि भारत ने जाधव की पैरवी के लिए वकील नियुक्त नहीं किया है.

दूसरी बार ऐसा हुआ
पाकिस्तानी कानून मंत्रालय ने कोर्ट से कहा कि भारत 6 अक्तूबर की समयसीमा तक वकील नियुक्त करने में विफल रहा है, ऐसा दूसरी बार हुआ है. इसके बाद पीठ ने पाकिस्तान के अटार्नी जनरल खालिद जावेद खान (Attorney General of Pakistan Khalid Javed Khan) से पूछा कि क्या अदालत भारत की सहमति के बिना जाधव के लिए वकील नियुक्त कर सकती है? साथ ही पीठ ने खान से यह बताने को भी कहा है कि क्या अदालत की तरफ से वकील की नियुक्ति से इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस का फैसला प्रभावी तौर पर लागू होगा. मामले की अगली सुनवाई अब 9 नवंबर को होगी.

…तब दिया था आदेश
गौरतलब है कि भारत की तरफ से लगातार किसी भारतीय वकील या क्वींस काउंसल (ब्रिटिश महारानी की कानूनी सेवा के वकील) को नियुक्त करने की मांग की जा रही है, लेकिन पाकिस्तान इस मांग को ठुकरा रहा है. भारत ने 2017 में इस मामले में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद कोर्ट ने पाकिस्तान को खुली अदालत में दोबारा सुनवाई करने का आदेश दिया था.

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