अधिकारियों को बनाया चपरासी और चौकीदार, SDM को तहसीलदार: भ्रष्टाचार के खिलाफ एक्शन में CM योगी

लखनऊ। दंगाइयों से सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की वसूली हो या फिर माफियाओं की संपत्ति ध्वस्त करना हो, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विभिन्न मुद्दों पर ऐसे-ऐसे कड़े फैसले लेते हैं, जो मिसाल बनते हैं और बाद में अन्य राज्य भी उसका अनुकरण करते हैं। अब उन्होंने भ्रष्टाचारी अधिकारियों पर कार्रवाई की। यूपी में एक SDM लेवल के अधिकारी को डिमोट कर तहसीलदार बनाया गया था, वहीं अब एक अन्य अधिकारी को चपरासी बना दिया गया है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए यूपी सरकार ने प्रदेश के सूचना विभाग में तैनात 4 अपर सूचना अधिकारियों को डिमोट कर के उन्हें चपरासी, चौकीदार और सिनेमा ऑपरेटर और प्रचार सहायक का पद दे दिया गया है। नवंबर 2014 में जब यूपी में अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी की सरकार चल रही थी, तब इन सबका गलत ढंग से प्रमोशन किया गया था। इन्हें नियम विरुद्ध तरीके से आगे बढ़ाया गया था।

अब इन सभी को अपने-अपने मूल पदों पर वापस भेज दिया गया है। क्षेत्रीय प्रचार संगठन के तहत चारों कर्मचारी सूचना कार्यालय में तैनात थे, जहाँ ये चारों कर्मचारी पदोन्नति के बाद अधिकारी बना दिए गए थे। सूचना निदेशक शिशिर द्वारा जारी किए गए आदेशानुसार बरेली अपर जिला सूचना अधिकारी नरसिंह को डिमोट कर चपरासी बनाया गया है। वहीं मथुरा अपर जिला सूचना अधिकारी विनोद कुमार शर्मा को पदावनत कर सिनेमा ऑपरेटर कम प्रचार सहायक का पद दे दिया गया है।

वहीं बाकी बचे 2 अधिकारियों में से भदोही (संत रविदासनगर) अपर जिला सूचना अधिकारी अनिल कुमार सिंह को डिमोट कर के सिनेमा ऑपरेटर कम प्रचार सहायक का पद थमा दिया गया है। फिरोजाबाद अपर जिला सूचना अधिकारी दयाशंकर को तो चौकीदार के पद पर बिठा दिया गया। ये आदेश बुधवार (जनवरी 6, 2021) से तत्काल प्रभाव से लागू किया गया। इन अधिकारियों को अपना मूल पद संभाल कर मुख्यालय को रिपोर्ट करना है।

इससे पहले नवंबर 2020 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया था, “योगी आदित्यनाथ ने तहसील सरधना, मेरठ में नियमविरुद्ध ढंग से विनिमय की गई पशुचर श्रेणी की भूमि के संबंध में शासकीय हितों की उपेक्षा कर अमलदरामद का आदेश पारित करने के दोषी तत्कालीन SDM, सरधना, मेरठ को SDM पद से तहसीलदार के पद पर अवनति करने का आदेश दिया है। दोषी तत्कालीन उपजिलाधिकारी, सरधना, जनपद मेरठ, संप्रति उपजिलाधिकारी मुजफ्फरनगर हैं।”

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