‘भूखमरी वाले देश में राम मंदिर 10 साल बाद नहीं बन सकता?’: अक्षय पर पिल पड़े लिबरल्स

बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के लिए लोगों से वैसे ही दान करने की अपील की, जैसे रामसेतु बनाने के दौरान वानरों और गिलहरी ने किया था। कुछ लोगों को ये बात नागवार गुजरी और वो सेकुलरिज्म का चोला ओढ़ कर चले आए। आनंद कोयारी नाम के यूजर ने उन्हें अस्पतालों और स्कूलों के लिए चंदा इकट्ठाइकठ्ठा करने की सलाह दे दी और दावा किया कि कोरोना काल में एक भी मंदिर काम नहीं आया।

जबकि लॉकडाउन के दौरान गरीबों की देखभाल में देश ही नहीं, दुनिया भर के मंदिर आगे रहे और उन्होंने लोगों में सिर्फ जागरूकता ही नहीं फैलाई, वरन सरकारों को दान में भी बड़ी रकम दी। वहीं हरप्रीत सिंह नामक ‘किसान आंदोलन’ समर्थक ने लिखा कि अगर कोई शैक्षिक संस्थान बन रहा होता तो वो सोचता, राम मंदिर के लिए वो कभी दान नहीं देगा। राहुल शुक्ल नामक यूजर ने दावा कर डाला कि जब लॉकडाउन में सबके खाने के लाले पड़े हैं और इसने सबकी बाट लगा दी है, तब अक्षय ऐसी अपील कर गलत कर रहे हैं।

कुमार यादवेंद्र नामक यूजर ने लिखा, “इस कनाडाई नागरिक के झाँसे में नही आना। देश के दलितों-पिछड़ों-आदिवासियों-गरीबों-मजदूरों-किसानों को अपने बच्चों के लिए शिक्षा का बंदोबस्त करना चाहिए। एक-एक पैसा अपने बच्चों के बेहतर भविष्य पर खर्च करना शिक्षा जरूरी हैं। बाक़ी सब काम पीछे, शिक्षा हो आगे। इनका बेटा तो अभिनेता बनेगा। और आपका?” एक अन्य यूजर तो पैसों का ही हिसाब माँगने लगा।

अमित चौधरी नामक यूजर ने लिखा, “अब से पहले भी 1400 करोड़ रुपए इकट्ठे किए जा चुके हैं लेकिन आज तक उन पैसों का अता-पता भी नहीं है। इस देश में भूखमरी है, गरीब जनता है। उनके बारे में ध्यान देना जरूरी है। मंदिर तो आज नहीं तो कल 10 साल या 5 साल बाद फिर से बन जाएगा, लेकिन जो लोग भूख से मर रहे हैं उनका क्या?” परमवीर सिंह नामक यूजर ने उन्हें किसानों को दान देने की सलाह दे डाली।

बता दें कि बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अक्षय कुमार ने अयोध्या में निर्माणाधीन भव्य राम मंदिर के लिए डोनेशन की अपील की है। ‘खिलाड़ी’ नाम से विख्यात अभिनेता ने लिखा कि अयोध्या में हमारे भगवान श्रीराम के मंदिर का निर्माण शरू होना बहुत ख़ुशी की बात है और अब हमारी योगदान की बारी है। अक्षय ने बड़ी जानकारी दी कि उन्होंने इसके लिए अपना योगदान दे दिया है और उम्मीद जताई और लोग इससे जुड़ेंगे। उन्होंने इस दौरान एक रोचक कहानी का भी जिक्र किया, जो उन्होंने अपनी बेटी को सुनाई थी।

कुछ लोगों ने कहा कि भगवान को दान की ज़रूरत नहीं है, वहीं कुछ ने भूखे को भोजन देने की बातें कही। वहीं कइयों ने उनसे ‘किसान आंदोलन’ पर बोलने के लिए दबाव बनाया। एक ने उन्हें ‘अवसरवादी’ बताते हुए पूछा कि गिलहरी कैसे कुछ बोल सकती है? बलविंदर सिंह नामक यूजर ने लिखा कि मंदिर से केवल पुजारी को रोटी मिलती है। वहीं कुछ ने ‘कनाडियन’ कह कर उन्हें चिढ़ाने की कोशिश की।

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