डर..डर कर क्यों चल रही है मोदी सरकार? मुट्ठीभर खालिस्तानियों के आगे पुलिस की जान की कोई कीमत नहीं?

नई दिल्ली। कल रात गाजीपुर बार्डर पर बमुश्किल 30-40 कथित प्रदर्शनकारी कर रह गए थे, सैकड़ों की संख्या में पुलिस और पैरा मिलिट्री फोर्स के जवान थे, टिकैत लगभग सरेंडर की पोजीशन में था ! सिर्फ टिकैत को पुलिस जीप में बैठाने की कसर रह गई थी, मगर उसी वक्त टिकैत को रोने धोने और मीडिया से खुल कर रूबरू होने का खुल कर अवसर दे दिया गया ! कल सरकार चाहती तो गाजीपुर बॉर्डर साफ हो चुका था, मगर  फिर टिकैत को मजबूत होने का अवसर जानबूझकर प्रदान किया गया….

सुबह होते होते… रालोद की जाट राजनीति काम कर गई और गाजीपुर पर एक हज़ार से ज़्यादा लोग फिर से नारेबाजी करते दिखाई देने लगे ! यही हालत सिंघु बार्डर की भी थी, सिंघु बॉर्डर भी सुनसान पड़ा था,बमुश्किल 100 लोग थे, कोई एक्शन नहीं ! आज स्थानीय नागरिकों से खालिस्तानियों का टकराव हो गया, एक सिख ने कृपाण से एक SHO का हाथ घायल कर डाला ! किसानों का रूप धरे… खालिस्तान समर्थकों ने स्थानीय लोगों के ऊपर बर्बर पथराव किया,लोग घायल हुए हैं !

सरकार बताए कितने पुलिसवालों और नागरिकों को अस्पताल में देखने का इरादा है ? क्या शाहीनबाग के बाद वाले दंगे देखने को तलबगार हो, भाई लोगों ? क्या स्थानीय पब्लिक की तकलीफ से तुम्हे कोई तकलीफ नहीं ? क्या पश्चिमी उत्तरप्रदेश और हरियाणा की विस्फोटक स्थिति का तुम्हे कोई ज्ञान नहीं ? यह क्षेत्र धीरे धीरे प्रेशर कुकर बनते जा रहे हैं ! अब न्यायालय के कंधों का सहारा भी नहीं ले पाओगे ! आर या पार… निर्णय तो लेना होगा !

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