महबूबा मुफ्ती ने कहा, जमात ए इस्लामी पर प्रतिबंध लगाकर लोकतंत्र में बाहुबल से निपटना चाहती है मोदी सरकार

श्रीनगर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और नेशनल कांफ्रेंस ने जमात-ए-इस्लामी जम्मू कश्मीर पर प्रतिबंध लगाने के केंद्र के फैसले की शुक्रवार को आलोचना की और कहा कि यह लोकतंत्र की उस मूल भावना के खिलाफ है जो विरोधी राजनीतिक विचारों की अनुमति देता है. पीडीपी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने इस राजनीतिक मुद्दे को बाहुबल से निपटने की केंद्र सरकार की पहल का एक अन्य उदाहरण बताया. उन्होंने कहा कि क्या ‘बीजेपी विरोधी’ होना अब राष्ट्र-विरोध है.

पूर्व मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया, ”लोकतंत्र में विचारों का संघर्ष होता है. ऐसे में जमात ए इस्लामी (जेके) पर पाबंदी लगाने की खबर निंदनीय है और यह जम्मू कश्मीर के राजनीतिक मुद्दे से कठोरता और बल प्रयोग के जरिए निपटने के भारत सरकार के रुख का एक अन्य उदाहरण है.”

अप्रैल, 2016 से जून, 2018 तक बीजेपी के साथ गठबंधन सरकार की अगुवाई कर चुकीं महबूबा ने लिखा, ”भारत सरकार जमात ए इस्लामी से इतनी असहज क्यों है? हाशिये के तत्वों का प्रतिनिधित्व करने वाले कट्टरपंथी हिंदू संगठनों को दुष्रचार करने और माहौल बिगाड़ने के लिए पूरी छूट दी जाती है.”

बीजेपी के पूर्व सहयेागी पीपुल्स कांफ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन ने कहा, ”लोकतंत्र की असली परीक्षा कुछ खास राजनीतिक रूझान वाले लोगों को सलाखों के पीछे डालने के बजाय विरोधी राजनीतिक विचारों एवं विचारधाराओं को अनुमति देने में है.”

केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को जेके ऊपर इस आधार पर पांच साल के लिए पावंदी लगा दी थी कि इस दल का साठगांठ आतंकवादी संगठनों के साथ है और राज्य में अलगाववादी आंदोलन बहुत तेज होने की आशंका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा पर उच्चस्तरीय बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत इस संगठन पर पाबंदी लगाते हुए अधिसूचना जारी की थी.

वहीं पाबंदी लगने के बाद सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि जमात-ए-इस्लामी (जेईएल) ही जम्मू कश्मीर राज्य के सबसे बड़े आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन और हुर्रियत कांफ्रेंस के गठन के लिए जिम्मेदार है. सरकारी अधिकारियों के अनुसार यह संगठन कई साल से अपने अलगाववाद और पाकिस्तान समर्थन एजेंडे के तहत राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए राज्य में अलगाववादियों और आतंकवादियों को साजो-सामान दे रही है.

एक अधिकारी ने कहा, ”जेईल (जेएंडके) जम्मू कश्मीर में सक्रिय सबसे बड़े आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के गठन के लिए जिम्मेदार है. पाकिस्तान के सहयोग से ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के गठन के पीछे भी जेएल का ही दिमाग है.” अधिकारी ने बताया कि अलगावादियो और आतंकवादी रूझान के शख्सियतों का संगठन हुर्रियत जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित हिंसक आतंकवाद को वैचारिक समर्थन देता आ रहा है.

अधिकारी के अनुसार जेईएल (जेएंडके) के नेता जम्मू कश्मीर का भारत में विलय को चुनौती देते आ रहे हैं जिससे उसका अलगाववादी उद्देश्य बिल्कुल साफ नजर आता है. अधिकारी ने कहा कि यह संगठन कश्मीर घाटी में अलगावादियों और कट्टरपंथियों के प्रचार प्रसार के लिए जिम्मेदार मुख्य संगठन है और वह हिज्बुल मुजाहिदीन को रंगरूटों की भर्ती, उसके लिए धन की व्यवस्था, आश्रय और साजो-सामान के संबंध में सभी प्रकार का सहयोग देता आ रहा है.

अधिकारियों ने कहा कि राज्य खासकर दक्षिण कश्मीर क्षेत्र में जमात-ए-इस्लामी जम्मू कश्मीर (जेईएल जेएंडके) के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता हैं और हिज्बुल मुजाहिदीन पाकिस्तान के सहयोग से प्रशिक्षण दे रहा है और हथियारों की आपूर्ति कर रहा है एवं वह कश्मीर घाटी में आतंकवादी गतिविधियों की सक्रिय अगुवाई कर रहा है.

हिज्बुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन जम्मू कश्मीर का पाकिस्तान में विलय का समर्थन करता है. अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल पाकिस्तान में छिपा सलाहुद्दीन पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों के गठबंधन यूनाइटेड जेहाद परिषद का अध्यक्ष भी है.

जेईल (जेएंडके) जमात -ए-इस्लामी हिंद के अंग के तौर पर 1945 में बना था और वह अपने मूल संगठन के साथ राजनीतिक विचारधारा में मतभेद को लेकर 1953 में उससे लग हो गया. इस संगठन पर उसकी गतिविधियों को लेकर अतीत में दो बार प्रतिबंध लगाया गया. पहली बार 1975 में जम्मू कश्मीर सरकार ने दो साल के लिए और दूसरी बार अप्रैल 1990 में केंद्र सरकार ने तीन साल के लिए प्रतिबंध लगाया था. दूसरी बार प्रतिबंध लगने के समय मुफ्ती मोहम्मद सईद केंद्रीय गृह मंत्री थे. एक अन्य अधिकारी ने कहा कि जेईएल (जेएंडके)के कार्यकर्ताओं का एक बड़ा तबका आतंकवादी संगठनों खासकर हिज्बुल मुजाहिदीन के लिए खुल्लम-खुल्ला काम करता है