एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली स्वप्ना का दर्द दूर करेगा साई, बनवाकर देगा कस्टमाइज जूते

नई दिल्ली।  18वें एशियन गेम्स में पैरों में दर्द के बावजूद गोल्ड जीतने वाली स्वप्ना बर्मनके लिए अच्छी खबर है. उन्हें इस दर्द से जल्दी ही राहत मिल सकती है. साई (स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया)  ने उनके लिए खास तरीके के जूते बनाने के लिए एडिडास से करार किया है. 21 साल की स्वप्ना ने एशियन गेम्स में हेप्टाथलॉन में गोल्ड मेडल जीता था. वे ऐसा करने वाली भारत की पहली एथलीट भी हैं.

ओलंपिक के लिए टॉप्स स्कीम में शामिल हैं स्वप्ना 
पश्चिम बंगाल की स्वप्ना के पैरों में छह-छह उंगलियां हैं. इस कारण उन्हें सामान्य जूते पहनने में दिक्कत होती है. जूते पहनकर दौड़ने या खेलने से उनकी परेशानी और बढ़ जाती है. वे अक्सर दर्द से जूझती रहती हैं. एशियन गेम्स में मेडल जीतने के बाद उन्होंने अपना दर्द साझा किया था. स्वप्ना को पिछले साल सितंबर में सरकार की टॉप्स स्कीम में शामिल किया गया था. टॉप्स स्कीम में उन खिलाड़ियों को शामिल किया जाता है, जो ओलंपिक में पदक जीत सकते हैं.

साई ने किया एडिडास से करार 
साई महानिदेशक नीलम कपूर ने कहा, ‘स्वप्ना का मामला जानने के बाद खेल मंत्रालय ने हमें निर्देश दिया कि उसके (स्वप्ना) लिए विशेष जूतों का इंतजाम किया जाए. हमने एडिडास से इस संबंध में बात की. उसने स्वप्ना के लिए विशेष तौर पर जूते डिजाइन करने पर सहमति जताई है. उम्मीद है कि जल्दी ही उन्हें अपने पैरों के हिसाब से जूते मिल जाएंगे.’

स्वप्ना से मिलकर बात करूंगा: कोच
स्वप्ना के कोच सुभाष सरकार ने भी बताया की कि उन्हें साई का ईमेल मिला है. इसमें स्वप्ना के जूते के लिए जरूरी जानकारी मांगी गई थी. उन्होंने कहा, ‘हां, मुझे साई से ईमेल आया, जिसमें स्वप्ना के लिए कस्टमाइज जूते के लिए जानकारी मांगी गई है. मुझे अभी स्वप्ना से मिलना है. वह अभी चोटिल है. मैं जैसे ही उससे मिलूंगा, उससे इस बारे में बात करूंगा.’

साई कॉम्प्लेक्स के पास घर चाहती हैं स्वप्ना 
जलपाईगुड़ी की रहने वाली स्वप्ना बर्मन के पास कोलकाता में रहने के लिए स्थायी घर नहीं है. उन्होंने हाल ही में कहा था, ‘मेरी एक ही इच्छा है कि मेरा साई कॉम्पलेक्स के पास एक घर हो. मुझे अभी साई कॉम्पलेक्स में रहना होता है लेकिन जब मेरी ट्रेनिंग नहीं होती तो मेरे पास रहने के लिए जगह नहीं है. अगर सरकार मुझे एक घर देती है तो मेरी बहुत मदद हो जाएगी.’

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