नाबालिग ने 4 साल की मासूम से किया दुष्कर्म, चालान पेश होने के 6 घंटे में आया फैसला

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के उज्जैन के पास घटिया में एक 14 साल के नाबालिग बालक द्वारा 4 साल की मासूम से दुष्कर्म का मामला सामने आया है. जिसमें आरोपी को चालान पेश होने के सिर्फ 6 घंटे में ही दोषी करार देते हुए किशोर न्याय बोर्ड ने फैसला सुना दिया है. संभवतः यह देश का ऐसा पहला मामला है जब किसी मामले में चालान पेश होने के केवल 6 घंटे में ही फैसला सुना दिया गया हो. ऐसे में यह फैसला कहीं न कहीं देश की न्याय व्यवस्था और उन लाखों पैंडिंग केस के लिए मिसाल बन सकता है जिन पर सालों से फैसला नहीं आया है.

15 अगस्त को दिया घटना को अंजाम
बता दें मामला 15 अगस्त का है. जब 4 साल की एक बच्ची को उसी के गांव के एक किशोर ने पहले तो अपने घर बुलाया और उसके साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया. जिसके बाद बालिका के परिजनों ने घटिया थाने में किशोर के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया. ऐसे में मामले की सूचना मिलते ही आरोपी किशोर गांव से भागकर राजस्थान चला गया, लेकिन पुलिस ने आरोपी को चौमहला से उसी के एक रिश्तेदार के यहां से धर दबोचा.

राजस्थान से किया गया गिरफ्तार
किशोर को हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने बच्ची और किशोर का मेडिकल कराया और डीएनए जांच के लिए ब्लड सेंपल सागर स्थित एफएसएल भेजा दिया. इसके लिए एक सब इंस्पेक्टर वहां गए थे. राऊ स्थित लैब में भी जरूरी जांचें कराई गईं. जिसमें बच्ची से दुष्कर्म की पुष्टि हुई. इसके बाद सोमवार सुबह 11.15 बजे मालनवासा स्थित किशोर न्याय बोर्ड में चालान प्रस्तुत किया. न्यायाधीश तृप्ति पांडे ने तत्काल सुनवाई शुरू करते हुए गवाहों, अन्य सबूतों,मेडिकल तथा डीएनए रिपोर्ट के आधार पर बोर्ड ने किशोर को दोषी पाया और शाम 5.15 बजे फैसला सुना दिया.

11.15 बजे चालान पेश हुआ
न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए किशोर को बाल संप्रेक्षण गृह भेजने का आदेश दिया. जज ने फैसले में लिखा बच्चों के प्रति लैंगिंक शोषण का भाव समाज में बढ़ रहा है. उसे देखते हुए विकृत मनोवृत्ति सुधारने के लिए किशोर को दो वर्ष सुधार गृह भेजना आवश्यक है. बता दें मामले में कोर्ट रूम में सुबह 11.15 बजे चालान पेश हुआ था. जिसके बाद शाम 5.15 पर बोर्ड ने आरोप पढ़कर सुनाए. तीन सदस्यीय बोर्ड की पीठासीन अधिकारी न्यायाधीश तृप्ति पांडे के निर्देश पर ट्रायल शुरू. मामले में 42 गवाह थे. इनमें से 13 प्रमुख गवाहों के बयान हुए.

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