10 साल की उम्र से सीख रहे कुश्‍ती के दांव-पेंच, पिता ने की जी तोड़ मेहनत, जानें कौन हैं रवि दहिया

हर कोई चैंपियन नहीं बनता, सपने तो सब देखते हैं लेकिन उन्‍हें पूरा करने का हौसला वो जज्‍बा बहुत कम ही लोगों में होता है । रवि कुमार दहिया की ओलंपिक में सफलता उनके पिता के सपनों का नतीजा है, जो सपने वो खुद के लिए पूरे ना कर सके उन्‍हें अपने बेटे में देखा और जी जान लगा दी । आज बेटा दुनिया के मंच पर उनका नाम और देश का सम्‍मान बढ़ा रहा है । रवि कुमार के पिता ने बचपन में ही उन्‍हें कुश्‍ती के अखाड़े से मिला दिया था ।

10 साल की उम्र से ट्रेनिंग
आर्थिक मजबूरी के कारण भारतीय पहलवान रवि कुमार दहिया के पिता राकेश कुमार अपने कुश्‍ती के सपने को पूरा नहीं कर सके, लेकिन जब बेटा हुआ तो उस पर पूरी जान झोंकने से नहीं हिचके । 1997 में रवि दहिया का जन्म हरियाणा के सोनीपत जिले के नहरी गांव में हुआ था । पिता एक किसान थे, लेकिन अपनी जमीन ना होने के कारण किराए की जमीन पर खेती करते थे । बेटे की अखाड़े से मुलाकात गांव में ही करा दी थी । पिता ने 10 साल की उम्र से ही रवि को दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में ट्रेनिंग के लिए भेज दिया । उन्होंने 1982 के एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाले सतपाल सिंह से ट्रेनिंग ली है । रवि दहिया के पिता ने आर्थिक तंगी होने के बावजूद उन्होंने अपने बेटे की ट्रेनिंग में कोई कसर नहीं छोड़ी ।

40 किमी. का सफर
आपको ये जानकर के हैरानी होगी कि रवि दहिया के पिता राकेश हर रोज अपने गांव से छत्रसाल स्टेडियम तक की 40 किलोमीटर की दूरी तय कर बेटे तक दूध और फल पहुंचाते थे । उनकी इसी महेनत का परिणाम है, रवि का ये सफर । आज पूरे देश को उनसे गोल्‍ड की उम्‍मीद बंधी है । रवि ने 2019 में जब वर्ल्ड चैम्पियनशिप में ब्रॉन्ज जीता था, तब उनके पिता उनके इस मैच को नहीं देख सके थे, वो तब भी खेतों में जी तोड़ मेहनत कर रहे थे, ताकि उनके बेटे के सपने पूरे हो सकें ।

जीत की ओर बढ़ते रहे रवि दहिया
रवि दहिया को करियर में चोट ने भी परेशान किया, लेकिन उन्‍होंने हार रहीं मानी । 2015 जूनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में रवि ने पहली बार 55 किलो कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीता, लेकिन वो सेमीफाइनल में चोटिल हो गए । इसके बाद सीनियर वर्ग में भी चोट के कारण उन्हें पीछे हटना पड़ा । 2017 के सीनियर नेशनल्स में चोट ने फिर उन्हें परेशान किया । करीब साल में वो पूरी तरह से ठीक होकर मैदान में लौटे और फिर बुखारेस्ट में 2018 वर्ल्ड अंडर 23 रेसलिंग चैम्पियनशिप में 57 किलो कैटेगरी में सिल्वर पर कब्जा जमाया। रवि ने 2019 के वर्ल्ड चैम्पियनशिप के सेलेक्शन ट्रायल में सीनियर रेसलर उत्कर्ष काले को हराया और ओलंपियन संदीप तोमर को भी धूल चटाई । साल 2020 भी रवि के लिए काफी अच्छा रहा, कोरोना से पहले मार्च महीने में दिल्ली में हुई एशियन रेसलिंग चैम्पियनशिप में उन्होंने गोल्ड जीता था।

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