US: चुनाव से पहले रूसी हैकरों ने राजनीतिक दलों को बनाया निशाना, Microsoft ने किया खुलासा

वॉशिंगटन। माइक्रोसॉफ्ट ने कहा कि उसने मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिकी राजनीतिक दलों को निशाना बनाने वाले नए रूसी हैकिंग प्रयासों का पता लगाया है. कंपनी ने कहा कि रूसी सरकार से संबद्ध एक हैकिंग समूह ने फर्जी इंटरनेट डोमेन बनाए जो दो अमेरिकी रूढ़िवादी संगठनों को चकमा देते प्रतीत हुए. ये दो संस्थान हडसन इंस्टीट्यूट और इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट हैं. तीन अन्य फर्जी डोमेन भी डिज़ाइन किए गए थे जिनसे लगता था कि वे अमेरिकी सीनेट से संबंधित हैं. माइक्रोसॉफ्ट ने फर्जी साइटों के बारे में और विवरण नहीं दिया. माइक्रोसॉफ्ट के इस खुलासे से कुछ हफ्ते पहले ही सीनेटर क्लेयर मैककैसकिल ने खुलासा किया था कि रूसी हैकरों ने सीनेट कंप्यूटर नेटवर्क में घुसपैठ करने का असफल प्रयास किया था.

क्लेयर फिर से चुनाव मैदान में हैं. माइक्रोसॉफ्ट के अध्यक्ष और मुख्य कानूनी अधिकारी ब्रैड स्मिथ ने पिछले दिनों एक साक्षात्कार में कहा था कि इस बार, हैकिंग का प्रयास एक राजनीतिक दल को मदद करने से ज्यादा लोकतंत्र को बाधित करने पर केंद्रित है.

सावधान! कहीं आपका यूजरनेम और पासवर्ड चोरी तो नहीं हो गया?

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एक रशियन फर्म ने दुनिया की सबसे बड़ी हैकिंग की है.  यह दावा किया जा रहा है कि रूसी हैकर समूह ने 50 करोड़ ई-मेल पतों के लगभग सवा अरब यूजरनेम और पासवर्ड हैक किए हैं.  न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक कुल 50 करोड़ ई-मेल पते हैक किए गए हैं.  हैकिंग का आरोप दक्षिण मध्य रूस के 20 हैकरों के समूह पर लगाया जा रहा है.  हैकिंग के दौरान 4.2 लाख बेवसाइटों को निशाना बनाया गया.  यह डाटा करीब चार लाख बीस हजार वेबसाइटों से चुराया गया है जिसमें इंटरनेट जगत की कई बड़ी कंपनियां समेत हर तरह की वेबसाइट शामिल है.  हैकिंग अभियान से प्रभावित होने वाली कंपनियों के नामों का खुलासा नहीं किया गया है.

सूचना सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक जिनका डाटा हैक किया गया है वे काफी संवेदनशील हैं.  रिपोर्ट में कहा गया है कि अपराधियों ने कुछ रिकॉर्ड ऑनलाइन बेच दिया है जबकि ज्यादातर सूचनाएं मार्केटिंग और स्पैम सोशल नेटवर्क को रकम के बदले दी गई हैं.  अखबार के मुताबिक एक अन्य सुरक्षा विशेषज्ञ का कहना है कि बड़ी कंपनियों को इस बात की जानकारी है कि उनका डाटाबेस चुराया गया है लेकिन उन्हें इस बारे में देर से पता चला है.  कंपनी का दावा है कि रूसी समूह ने सबसे पहले हैकरों से डाटाबेस हासिल किया और उसके बाद सोशल मीडिया, ईमेल सेवाओं और अन्य वेबसाइटों पर स्पेम भेजकर डाटा चुराया.