राजस्थान: कांग्रेस की दूसरी लिस्ट जारी, वसुंधरा के खिलाफ जसवंत सिंह के पुत्र मानवेन्द्र को मैदान में उतारा

जयपुर। राजस्थान में 7 दिसंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने श‍न‍ि‍वार को उम्‍मीदवारों की दूसरी लिस्ट जारी कर दी. बता दें, इस लिस्ट को जारी करने से पहले शनिवार सुबह काफी देर तक मंथन का दौर चला था. कांग्रेस ने इसमें अपने 32 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. इस तरह पार्टी द्वारा अब तक कुल 184 उम्मीदवारों की घोषणा की जा चुकी है.

खास बात यह है कि पार्टी ने अपनी इस लिस्ट में भाजपा के पूर्व नेता मानवेन्द्र सिंह को प्रत्याशी बनाया है और उन्‍हें झालरापाटन से टिकट दिया है. मानवेंद्र सिंह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सीनियर मंत्री रहे जसवंत सिंह के पुत्र हैं.

आपको बता दें, मानवेंद्र सिंह ने हाल ही में बीजेपी से नाराज होकर कांग्रेस के साथ हाथ मिलाया था, जिसके बाद कांग्रेस द्वारा उन्हें झालरापाटन से टिकट दिया गया है. यानि मानवेन्द्र सिंह झालरापाटन से मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे.

गौरतलब है कि झालरापाटन को सीएम राजे का गढ़ माना जाता है और शायद इसी वजह से कांग्रेस द्वारा काफी सोच विचार कर ही मानवेंद्र को यहां से चुनाव में उतारा गया है.

इसके अलावा हवामहल से महेश जोशी, मालवीय नगर से डॉ. अर्चना शर्मा, सांगानेर से पुष्पेंद्र भारद्वाज, आदर्श नगर से रफीक खान, बूंदी से हरी मोहन शर्मा, गंगापुर से राजेश अग्रवाल को टिकट दिया गया है.

बीजेपी में खुद की अनदेखी के चलते कांग्रेस में शामिल हुए मानवेंद्र
दरअसल, मानवेन्द्र सिंह बीते चार-पांच सालों से बीजेपी में हो रही उनकी अनदेखी से नाराज थे, जिसके बाद उन्होंने बीजेपी पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि मैंने जब भी बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को इन मुद्दों से अवगत कराया, तो उन्होंने इस पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी. सिंह ने कहा था कि अब मेरा धैर्य जवाब दे चुका है और मैं पार्टी छोड़ रहा हूं. ‘कमल का फूल, हमारी भूल’ कहते हुए उन्होंने बीजेपी छोड़ने की बात पर मोहर लगाई थी. माना जाता है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बाड़मेर से पिता जसवंत सिंह को टिकट नहीं मिलने के बाद से ही मानवेन्द्र बीजेपी से नाराज चल रहे थे.

हालांकि, जसवंत ने एक निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था और वे बीजेपी के प्रत्याशी सोनाराम से चुनाव हार गए थे. बता दें कि 2014 के चुनाव में मानवेंद्र ने बीजेपी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ अपने पिता के लिए प्रचार किया था. कहा जाता है कि वे तब से ही बीजेपी के साथ अघोषित युद्ध पर थे. बता दें कि विधायक मानवेन्द्र सिंह पूर्व में बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा क्षेत्र से सांसद रह चुके हैं. 2003 के लोकसभा चुनाव में मानवेन्द्र सिंह ने सबसे ज्यादा मत पाकर रिकॉर्ड जीत हासिल की थी.

मानवेन्द्र की नाराजगी का एक कारण यह भी बताया जा रहा था कि बीजेपी की अटल सरकार में वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री रहे जसवंत सिंह की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उस समय उनसे मिलने वरिष्ठ बीजेपी नेता एलके आडवाणी के अलावा और कोई बीजेपी नेता नहीं पहुंचा था.  हालांकि मानवेंद्र सिंह के बीजेपी छोड़ने के बाद कांग्रेस में शामिल होने से कांग्रेस को फायदा जरूर मिलेगा. गौरतलब है कि राजपूत समुदाय प्रदेश में बीजेपी का एक बड़ा वोट बैंक है.