राफेल डील पर SC के फैसले को कांग्रेस ने बताया एकतरफा, कहा- हमें यह मंजूर नहीं

नई दिल्‍ली। भारत और फ्रांस के बीच हुई राफेल डील की जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला दिया है. याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सीजेआई रंजन गोगोई की पीठ ने इस सौदे के प्रक्रिया में कोई भी गड़बड़ी ना होने की बात कही है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की एसआईटी जांच से भी इनकार कर दिया है. इस पर कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला एकतरफा है.

कांग्रेस नेता सुरजेवाला ने कहा ‘ कांग्रेस ने कहा था राफेल डील की अनेक परते हैं, जांच केवल जेपीसी कर सकती है. बोफोर्स में भी यही हुआ था तो आज मोदी जी क्यों बच रहे हैं. मोदी जी को चुनौती देते हैं, जेपीसी स्वीकार करें. राफेल डील की आधी अधूरी सूचना सुप्रीम कोर्ट में रखी गई थी. इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने आज ये फैसला दिया है. ये राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा नहीं, भ्रष्‍टाचार का मुद्दा है.

वहीं कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर साल उठाए हैं. उन्‍होंने कहा है कि कोई जश्न मनाने की ज़रुरत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट इस मामले की डिटेल में नहीं गया. उन्‍होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में विरोधाभास है. हम इसे स्‍वीकार नहीं कर सकते हैं. एचएएल को इस सौदे से किस तरह से बाहर किया गया. सुप्रीम कोर्ट ने ये सब नहीं देखा. जेपीसी को अधिकार है कि सारे कागज मंगाए. राहुल गांधी ने जो भी कहा है वो एकदम सही कहा है.

अमित शाह ने कहा है कि आज सुप्रीम कोर्ट में सत्‍य की जीत हुई है. उन्‍होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि झूठ के आधार पर देश की जनता को गुमराह करने की कोशिश की गई है. विमानों की गुणवत्‍ता पर भी सुप्रीम कोर्ट ने कोई सवाल नहीं उठाया है. राफेल सौदे में देरी पर देश की जनता को कांग्रेस जवाब दे. कांग्रेस ने सभी सौदे में बिचौलिये रखे. यूपीए सरकार में घोटालों की लड़ी लगी हुई थी.

उन्‍होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से सवाल किया कि 2007 से 2014 तक राफेल डील क्‍यों नहीं हो पाई. आपका सोर्स ऑफ इंफॉर्मेशन क्‍या है, इसे सार्वजनिक करें. उन्‍होंने कहा कि आपको मामले पर देश की जनता और सेना से माफी मांगनी चाहिए. शाह ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने और अपनी पार्टी के तत्काल फायदे के लिए झूठ का सहारा लेकर चलने की एक नई राजनीति की शुरुआत की और सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने आज सिद्ध कर दिया है कि झूठ के पैर नहीं होते और अंत में जीत सत्य की ही होती है.