रायबरेली में PM मोदी को क्यों याद आए राजनारायण, इंदिरा गांधी से क्या है उनका कनेक्शन?

लखनऊ/रायबरेली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार रविवार को यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली पहुंचे. यहां उन्होंने भाषण की शुरुआत में कहा कि रायबरेली की जनता ने राजनारायण को भी आर्शीवाद दिया है. ऐसे में सर्च ईंजन गूगल से लेकर सोशल मीडिया फेसबुक और ट्विटर पर युवा वर्ग के बीच चर्चा चल रही है कि आखिर राजनारायण कौन हैं, जिनका नाम पीएम मोदी ने रायबरेली की रैली में लिया है. आइए राजनारायण के बारे में जानते हैं.

इंदिरा गांधी को हराने वाले नेता
भारतीय राजनीति में अगर राजनारायण का परिचय एक पंक्ति में दिया जाए तो वह है, ‘वह नेता जिसने रायबरेली में इंदिरा गांधी को चुनाव में पटखनी दी थी.’ साल 1977 में इमरजेंसी के बाद हुए लोकसभा चुनाव में राजनारायण ने ताकतवर नेता इंदिरा गांधी को रायबरेली में हरा दिया था. इसके बाद केंद्र में पहली बार मोरारजी देसाई की अगुवाई में बनी गैर कांग्रेसी सरकार में राजनारायण स्वास्थ्य मंत्री बनाए गए थे. राजनारायण की यह जीत इसलिए अहम मानी जाती है क्योंकि रायबरेली गांधी नेहरू परिवार की परंपरागत सीट रही है। इसी सीट से 1952 और 1957 के लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी चुनाव जीते थे। 1977 के चुनाव में राजनारायण के हाथों हारने के बाद इंदिरा गांधी कर्नाटक के चिकमंगलूर सीट से चुनाव जीती थीं.

जब राजनारायण ने ताकतवर इंदिरा को बना दिया था लाचार
राजनारायण के चलते इस देश की राजनीति में एक नया रंग देखने को मिला था. यूं कहें कि भारतीय राजनीति ने एक बड़ी करवट ली थी. साल 1971 के लोकसभा चुनाव में रायबरेली सीट से संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी राजनारायण को इंदिरा गांधी के हाथों हार झेलनी पड़ी थी. राजनारायण ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दायर की कि इंदिरा ने बतौर प्रधानमंत्री सरकारी मशीनरी का प्रयोग कर उन्हें चुनाव में हराया है. हाईकोर्ट ने 12 जून 1975 को इंदिरा गांधी के चुनाव को खारिज करते हुए उन्हें अयोग्य करार दिया। हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी के 6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी।

अमीर परिवार में जन्में लेकिन समाजवादी नेता रहे राजनारायण
राजनारायण का जन्म 23 नवंबर 1917 को वाराणसी के पास मोतीकोट में हुआ था. उनका परिवार काफी संभ्रांत था. स्कूली शिक्षा के दौरान ही राजनारायण का झुकाव समाजवादी की तरफ हो गया था. जब वे सक्रिय राजनीति में आए तो राममनोहर लोहिया सरीखे नेताओं के सहयोगी रहे. कुलीन परिवार में जन्म लेने के बाद भी वे गरीबी उन्मूलन, समाजवाद, बराबरी का हक जैसी बातें करते थे. दिलचस्प बात यह है कि उनका रामचरित मानस में काफी आस्था थी. वे अपने भाषणों में रामराज्य जैसी बातें करते थे.

राजनारायण के इन्हीं व्यक्तित्व के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेठी की जनसभा में उनका नाम लिया. पीएम मोदी राजनारायण के जरिए अमेठी की जनता को संदेश देने की कोशिश कर रहे थे कि उन्होंने न केवल इस सीट से गांधी परिवार के सदस्य को संसद भेजा है बल्कि दूसरे लोग भी सांसद बनते रहे हैं.