Teacher’s Day 2018: भारतीय इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं इन 5 गुरुओं की महानता

नई दिल्ली। हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस (Teacher’s Day) बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है. इस दिन छात्र-छात्राएं शिक्षकों के प्रति अपने प्यार और सम्मान को प्रकट करते हैं. शिक्षकों (Teachers) और गुरूओं का हमारे जीवन में बेहद महत्वपूर्ण स्थान हैं. प्राचीन काल से ही गुरूओं का स्थान सबसे ऊपर रहा है. चन्द्रगुप्त मौर्य अपने गुरू चाणक्य के मार्गदर्शन की बदौलत ही नंदवंश का नाश कर राजा बने थे. प्राचीन काल के कई गुरूओं की विचारधारा को आज भी लोग फॉलों करते हैं. ऐसे में आज हम आपको भारतीय इतिहास के कुछ महान गुरूओं के बारें में बताने जा रहे हैं.

आइये जानते है भारतीय इतिहास के महान गुरुओं के बारे में.

द्रोणाचार्य
कौरवों और पांडवों के गुरु रहे द्रोणाचार्य भारतीय इतिहास के महान गुरुओं में से एक हैं. ऐसा कहा जाता है कि द्रोणाचार्य का जन्म उत्तरांचल की राजधानी देहरादून में हुआ था. महाभारत युद्ध के समय वह कौरव पक्ष के सेनापति थे. आपको बता दें कि गुरु द्रोणाचार्य को एकलव्य ने अपना अंगूठा गुरु दक्षिणा के रूप में दिया था.

गुरु वशिष्ठ​
गुरु वशिष्ठ​ राजा दशरथ के चारों पुत्रों के गुरु थे. वशिष्ठ के कहने पर दशरथ ने अपने चारों पुत्रों को ऋषि विश्वामित्र के साथ आश्रम में राक्षसों का वध करने के लिए भेज दिया था. गुरु वशिष्ठ को राजा बने बिना जो सम्मान  प्राप्त था उसके सामने राजा का पद छोटा दिखता था.

महर्षि वेदव्यास

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